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हिंदी भाषा की महिमा संग गति

 

हिंदी भाषा की  महिमा संग गति

डॉ मंजु गुप्ता


हिंदी की बोलियों का विकास हिंदी के ही विकास का

एक रूप में हिंदी की अनेक बोलियाँ हैं क्योंकि भक्ति काल में कलमकारों ने अपनी -अपनी बोलियों में मानवजाति में  अलौकिक ईश चेतना को जगाया था।  वर्गभेद , जाति -पाँति , अन्धविश्वास आदि की दीवारों को तोड़ा यह बोलियाँ थी ब्रजभाषा में सूरदास जी ने सूर सागर आदि रचा ।

अवधी ने संत तुलसीदास जी ने रामचरितमानस रच के   जन -मन -घर में पूजनीय बना दिया । बुंदेली, बघेली , भोजपुरी , मालवी , राजस्थानी मगही आदि मुख्य बोली हैं, यह हिंदी की शक्ति का बुस्टर के साथ अनेकता  में एकता की मिसाल है। ये भारतीय संस्कृति , इतिहास , रीति रिवाज , परंपराओं को बाँधे हुए हैं । भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली हिंदी भाषा है। मुम्बई का फ़िल्म उद्योग अवधी , भोजपुरी,

आदि और हिंदी फिल्मों  की भव्य महानगर है। हिंदी ने आजादी के आंदोलन में राष्ट्रजागरण की भूमिका निभायी।देशभर में इसने हर दिल में जगह बनायी।


आजादी के बाद  संविधान में राजभाषा का दर्जा मिला है। राजभाषा के रूप में अहिन्दी भाषी राज्यों में उड़ान भर   रही है। भारत , विश्व में हिंदी  द्रुतगामी गति से आगे बढ़ के विश्व पटल पर स्थापित हुयी है । विश्व के बाजारवाद , व्यापार की भाषा हिंदीं बनी है। दुनिया के एक सौ पचास  देशों में हिंदी पढ़ाई जाती है और यहॉं शोध कार्य  कर रहे हैं। कई देश जैसे इटली , श्रीलंका , रूस , मॉरिशिस आदि में स्नातक , स्नातकोत्तर , पीएचडी आदि का पाठ्यक्रम की व्यवस्था है। अमेरिका के तीस से ज्यादा विश्वविद्यलयों में हिंदी शिक्षा को स्थान मिला है। लगभग सौ देशों में हिंदी पढ़ी , बोली , लिखी जाती है।  एशिया की प्रतिनिधि भाषा है ।भारतीय महाकाव्य को प्रो ची.श्येन. ने रामचरितमानस, रामायण का चीनी भाषा में अनुवाद किया।  आ महामहिम प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी ने 27 सितंबर ,2014 में 'संयुक्त राष्ट्र संघ में' हिंदी में अपना भाषण देकर विश्व को संबोधित किया था। फ्लोरेंस विश्वविद्यालय , इटली में हिंदी शोध करता डॉ जुइजिपियो तैसितौरी ' रामचरित मानस ' और ' बाल्मिकी रामायण ' पर तुलनात्मक शोध आरंभ किया है।इन आधारों पर हिंदी की गति अपनी सक्रिय भूमिका में दिखायी दे रही है।


भारत की आजादी के आंदोलन के समय हिंदी नेताओं , जन -जन की संपर्क भाषा थी ।  गांधी जी, स्वामी दयानन्द सरसवती आदि गुजराती होते हुए हिंदी में काम करते थे ।भारत की आजादी के बाद से हिंदी  को संविधान ने राजभाषा के रूप में मान्यता दी । मेरे मतानुसार हिंदी राष्ट्रभाषा के रूप में बेहतर है जिस प्रकार राष्ट्र की एकता, अखंडता , संप्रभुता, देशप्रेम  को सिद्ध करने के लिये हम एक राष्ट्र ध्वज , एक राष्ट्रगीत और एक राष्ट्रचिह्न अपनाते हैं ,उसी प्रकार भाषाओं के क्षेत्र में हमेशा एक भाषा की जरूरत  है वह राष्ट्रभाषा हिन्दी है, क्योंकि हिंदी के शब्दकोष व्यापक भंडार है , इसकी देवनागरी लिपि वैज्ञानिक है । हिंदी भाषा सरल , सहज, लचीली , उच्चारण सुगम है । हर कोई आसानी से से हिंदी को सीख , बोल लेता है। डॉ मनोज पांडे ने कहा -"भाषा के बिना संस्कृति पंगु है , संस्कृति के अभाव में भाषा अंधी है। "भारतेन्दु जी ने भी कहा -

"निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल

बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।"

भारतीय संस्कृति , एकता , राष्ट्रीय चेतना की

 हिंदी आत्मा है

हिंदी की भाषागत शुद्धता के प्रति 

असावधानी एक स्वीकार्य क्रीड़ा है। मैं तो ऐसा ही मानती हूँ।

आज तो प्रतिष्ठित अखबारों , पत्रिकाओं में अक्षरों में 

वर्तनी की गलती ,अनुस्वार , अनुनासिक

 लिंग आदि की व्याकरण की गलतियों से भरा रहता है।

। भाषा की अशुद्धता को दर्शाता है। ऐसी गलतियाँ 

भाषा को लगड़ी बना के लुप्त होने के 

कगार पर खड़ी हो जाती हैं।

समय के परिवर्तन के साथ अब एक विधिक और प्रशासनिक भाषा के रूप में हिंदी की स्थिति थोड़ी सुधरी , थोड़ी परिपक्व , जटिल भी हुई है । न्यायालय के फैसलों को  हिंदी की गुणवत्ता की वजह से अहिंदीभाषी   कुछ राज्य अपनी भाषा के साथ हिंदी में दे रहे हैं, जबकि सर्वोच्च न्यायालय में अंग्रेजी का ही वर्चस्व है।  विधि की  हिंदी में किताबें हैं लेकिन भाषा किलिष्ट होने से  कानून की पढ़ाई छात्र अंग्रेजी में करना पसंद करते हैं। प्रशासनिक सेवाओं के ऑन लाइन फॉर्म हो या राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु फॉर्म भी अंग्रेजी में होते हैं। जिसे हिंदी भाषी , जो अंग्रेजी नहीं जानता है उसे पेचीदा ही लगती है। विश्व व्यापार के आयात -निर्यात के ऑन लाइन फॉर्म दिखावा ही है। इन का हिंदी में प्रयोग होना अभी चुनौती है।


हिंदी को एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में लोकप्रिय बनाने के लिए शिक्षण और प्रशिक्षण   में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की इंटरनेट के द्वारा ई -प्रशिक्षण की  पहल करने की जरूरत है।  सरकार इस तरह की व्यवस्था उपलब्ध कराए कि केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान  द्वारा , केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो  या अन्य माध्यम से ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करे। विदेशों में  स्थापित सभी भारतीय दूतावास हिंदी भाषा का बेसिक पाठ्यक्रम के आधार बनाके  , वर्कशॉप द्वारा विदेशी छात्रों को शिक्षण दें ।  सरकारी संस्थानों से हिंदी पत्रिका प्रकाशित हों।भारत की अब 7 वीं शक्ति सॉफ्ट पॉवर का भाषा अनुवाद  भारतीय सभी भाषाओं को आगे बढ़ा रहा है।   हम सब भारतीय प्रण करें कि  घर बाहर हम हिंदी में संवाद करें ।  स्वभाषा मजबूत होगी तो राष्ट्र मजबूत उन्नत बनेगा। जो राष्ट्र स्वयं का अन्न नहीं उगा सकता तो वह भूखा रहेगा । जिस राष्ट्र की अपनी भाषा नहीं होगी उसका इतिहास , संस्कृति , समूल नष्ट हो जाएगी। जिस राष्ट्र में स्वतः के बुनकर नहीं होंगे उस राष्ट्र में तन ढकने के लिए वस्त्र नहीं होंगे। हिंदी भाषा आसान होने से विश्व को स्वतः जोड़ रही। है। इसलिए राजनैतिक स्वार्थ को छोड़ो हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाएँ। मातृभाषा  हिंदी माँ , माटी  इतिहास  और संस्कृति से जोड़ती है। अंत में अनुभव का निचोडमुक्तक में हिंदी दिवस

1

   हिंदी  मैं गर्व से सिखाती  हूँ,

    हिंदी मैं शान से  पढ़ाती हूँ ,

 हिंदी से  जुड़ी जीविका  मेरी,

  हिंदी में ओढ़ के बिछाती  हूँ ।।

2

  है सुरवाणी से जन्मी   हिंदी ,

 है यह देश के भाल की बिंदी ,

राष्ट्रसंघ ने  भी महिमा जानी ,

भारतवासी की भाषा हिंदी ।।

3

  है  हिंदी युगों से महारानी ,

 जन - मन  - गण के भावों की रानी ,

वीणावादिनी की वंदना बन ,

गूँजे है  कवि-उर में पटरानी।।


4

 ये आन्दोलन की  बनी  लग्नेश ,

  ये  है तिलक का भी पर्व गणेश ,

 गोरे राज  गुलामी  में भड़की ,

   बन के आजादी का अग्निवेश   ।।


5

  है हर भाषा का यहाँ  सम्मान,

है विविधताओं से देश  महान ,

विभिन्न  भाषा - बोली से इसकी  ,

 बना है  हिंदी से  हिन्दुस्तान ।।


6

  अश्क - मुस्कान की भाषा हिन्दी,

 जोड़े प्रांतों के दिल को  हिंदी,

   भारत  की राजभाषा बनी पर,

   न बनी अभी राष्ट्र  भाषा हिंदी ।।



 


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