गुरु महिमा दोहे में
डॉ मंजु गुप्ता
लगे हमें गुरुवर सदा ,ब्रह्मा विष्णु महेश।
सबसे ऊँचा स्थान है, दर्शन लगे गणेश।।
गुरु पारसमणि हैं बने ,कैसे करूँ बखान
मिलती गुरु की जब कृपा , पाते तब भगवान।
शरण आपकी है मिले , देना आशीर्वाद।
सर्व दोष अवगुण मिटे, बरसे कृपा प्रसाद।।
ज्ञान ज्योत गुरुवर जला , करते जगत उजास।
जीवन तम गुरु दूर कर, रहते दिल के पास।।
गुरु की महिमा है बड़ी , बिन गुरु मिले न ज्ञान।
सही गलत का पथ बता , बनता शिष्य सुजान।।
गुरु सांदीपनि -से लगे , चौसठ कला जहान।
गुरु की मूरत में बसे , कोटि -कोटि भगवान ।।
किस्सा - कविता द्वारा हमें , देते सीख अनेक।
बचपन से मिट्टी गढ़ी , हमें बनाए नेक।।
गुरु से मिलता ज्ञान है , करते जग उजियार।
विद्या शिक्षा का मिले, हमको है उपहार।।
गुरु शब्दों की कोठरी , कविता की है खान ।
हमें वर्णमाला सिखा , दे अपार जग ज्ञान।।
न ककहरा जब याद हो , सिखलाते हर बार।।
बनके शिक्षक आप हैं, भरते चेतन धार।।
दे सर्जन का ज्ञान है , होता दृष्टि विस्तार।
जिज्ञासा को पंख दें , बन भविष्य आधार।।
बनती नैतिक सोच है, बुरा छुटे शुभ सार।
करते जाग्रत वे हमें , छुट जाता व्यभिचार।।
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