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Dr. Srimati Tara Singh
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दोहे में हिंदी दिवस

 

दोहे में हिंदी दिवस

युग है इंटरनेट का, फलती हिंदी शान।
अभिव्यक्ति का जग खिला, भारत की पहचान।। १

हिंदी धड़कन है बनी , बहे व्याकरण धार।
अलंकार रस छंद हैं , कविता का श्रृंगार।। २

हिंदी अब वैश्विक हुई , भारत की पहचान।
विज्ञापनों से बढ़ रही , हिन्द की है शान।। ३

बॉलीवुड की फ़िल्म भी , चलती हिंदी चाल।
करे कमाई खूब है, ' मंजू 'सालों साल।। ४

प्रांत अहिंदी के लिए , किया इसे आसान।
गढ़ा राजभाषा सहज , हिंदी सरल विधान।। ५

ऐक्य प्रेम भाषा बनी, राष्ट्र की यह जान।
चुनौतियों में चमकती , हिंदी की पहचान।। ६

संस्कृत इसकी मात है, बड़ा शब्द भंडार।
सजते प्रत्यय संधि रस , हिंदी का संसार।।७

देवनागरी लिपि बनी , वैज्ञानिक आधार।
जो बोले वह हैं लिखें , हिंदी का संस्कार।।८

भाषा आंदोलन बनी , जोड़े यह जन डोर
आजादी की राह यह,गूँजी चारों ओर। ९

बसते कबीर - सूर के , हिंदी में हैं प्रान।
जिस पर मीरा रीझ के , रचे श्याम के गान। १०

बिगड़ा हिंदी स्तर बड़ा , हम सब करें सुधार।
हम सब का दायित्व है , हिंदी से हो प्यार।। ११

हिंदी भाषा में सजा , उपमा रूपक सार।
भाव शिल्प की साधना ,देते हैं आकार।।१२

डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई

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