दोहे में गणेश चतुर्थी का महापर्व
प्रथम काम आरंभ में , करूँ विनायक याद।
होय सफल तब कार्य सब, विघ्न न आते बाद।
किसी कर्म शुरुवात में , लूँ गणपति का नाम ।
होय न संकट काम में , असंख्य बार प्रणाम।
करता वंदन जग तुम्हें , हो तुम दया निधान ।
करते भव- बाधा हरण , भक्तों की तुम जान ।
सच्चे मन से आपको , सभी नवाते शीश।
इच्छा करते पूर्ण हैं , भक्त-जनों की, ईश।
गणपति बप्पा मोरया , गूँजा है चहुँ ओर ।
जयकारों के बोल से , सभी दिशा में शोर ।
नाचे -गाते हैं सभी , गजानंद को लाय ।
मेले सम-आगम लगे , आस्था मन दुलराय।
शरणागत जो आपके , देते उनका साथ ।
सुन के दिल की बात तुम ,सिर पर रखते हाथ ।
सदा करूँ स्तुति आपकी , घट-घट में हो वास ।
जीवन के आधार बन , करना जगत निवास ।
यथा शक्ति पूजें तुम्हें , रखें चौथ व्रत भक्त।
काम सिद्ध करते सकल , शंकर-पुत्र सशक्त ।
दूर करो आतंक सब , रहे जगत में शांति ।
हृदय होय निर्मल सभी , फले प्रेम सुख क्रांति । डॉ मंजु गुप्ता,वाशी , नवी मुंबई
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