Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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दोहे में गणेश चतुर्थी का महापर्व

 

दोहे में गणेश चतुर्थी का महापर्व



प्रथम काम आरंभ में , करूँ विनायक याद।

होय सफल तब कार्य सब, विघ्न न आते बाद।



किसी कर्म शुरुवात में , लूँ गणपति का नाम ।

होय न संकट काम में , असंख्य बार प्रणाम।



करता वंदन जग तुम्हें , हो तुम दया निधान ।

करते भव- बाधा हरण , भक्तों की तुम जान ।



सच्चे मन से आपको , सभी नवाते शीश।

इच्छा करते पूर्ण हैं , भक्त-जनों की, ईश।



गणपति बप्पा मोरया , गूँजा है चहुँ ओर ।

जयकारों के बोल से , सभी दिशा में शोर ।



नाचे -गाते हैं सभी , गजानंद को लाय ।

मेले सम-आगम लगे , आस्था मन दुलराय।



शरणागत जो आपके , देते उनका साथ ।

सुन के दिल की बात तुम ,सिर पर रखते हाथ ।



सदा करूँ स्तुति आपकी , घट-घट में हो वास ।

जीवन के आधार बन , करना जगत निवास ।



यथा शक्ति पूजें तुम्हें , रखें चौथ व्रत भक्त।

काम सिद्ध करते सकल , शंकर-पुत्र सशक्त ।



दूर करो आतंक सब , रहे जगत में शांति ।

हृदय होय निर्मल सभी , फले प्रेम सुख क्रांति । डॉ मंजु गुप्ता,वाशी , नवी मुंबई

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