दोहे में हिंदी दिवस
डॉ मंजु गुप्ता
सरल , सहज हिंदी लगे , साहित्य का उजास।
देवनागरी में रचा , हिंदी का इतिहास।। 1
संस्कृत की गोदी मिली , हिंदी प्यारा नाम ।
बनी राजभाषा मृदुल , भारत इसका धाम।।2
मधुर मातृ भाषा लगे , भारत की पहचान।
रग - रग में यह है बहे , बसता हिंदुस्तान ।।3
जो बोले वैसा लिखे , वर्ण न अंतर भिन्न।
सभी बड़े आसान हैं , विराम चिह्न विभिन्न।।4
उच्चारण जैसा करें , वैसा लिखे कलाम ।
श्रुति लेखन से भी मिले , सही, गलत परिणाम ।।5
विश्व - गगन पर छा रही , वॉलीवुड के गान ।
फ़िल्म गीत को गा रहे , विश्व गीतज्ञ महान।।6
हिंदी से है महकता , प्यारा हिंदुस्तान।
एक सूत्र में बाँधती , विविध धर्म जहान।।7
वैज्ञानिकता पर खरा , उतरता मानदंड ।
विश्वनीय लिपि , व्याकरण , बनी है यह अखंड।।8
नफरत को है धो रही , बनी सुधा रसखान।
कबीर , तुलसी , सूर कलम , गाए है गुणगान ।।9
हिंदी भाषा में बसे , सूर श्याम के प्राण।
रच बसकर इसमें सभी , करें देश कल्याण।।10
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