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Dr. Srimati Tara Singh
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बोलता सुनहरा पिंजरा

 

बोलता सुनहरा पिंजरा

बोध कथा

 छात्रों को शिक्षिका  पीपल के डाल पर लटका सोने के पिंजरे की ओर इशारा करते हुए  छात्रों को  संबोधित कर रही थी कि कैद तोते बाहर निकलने के लिए कैसे फड़फड़ा रहे हैं । ऐसे ही सोने की चिड़िया यानी समृद्ध  शिक्षा पद्धति,संस्कृति ,कला, विज्ञान , आध्यात्म  आदि हर क्षेत्र में समृद्ध भारत  था ।

इसका वैभव देखकर गोरी  चमड़ी वाले  जो दिल से काले  थे । उनकी फूट डालो राज्य करो की नीति ने हमारी एकता को तोड़ा । हमारी भारत माँ को विदेशी शक्तियों ने गुलामी की बेड़ियों में  जकड़ लिया था । उनके अत्याचारों से परेशान होकर सारे

भारतवासियों ने संगठित होकर जिसमें बाल युवा बड़े छोटे जवान स्त्री पुरुष  अनगिनत  लोगो ने अपनी जान की  कुर्बानियाँ  देकर  भारत के गुलशन को सींचा।उन्होंने हमारे आज के लिए अपने कल को भारत माँ के लिए न्यौछावर किया।

तभी काम करने वाली मौसी ने वहीं पड़ी चाबी से पिंजरा खोल दिया । सारे तोते आजाद होकर  हौसले  की उड़ान आसमान में भरने लगे।

एक तोता वहीं मुँडेरे पर आजाद साँस लेते हुए जोर जोर से कहने लगा आजादी में जीवन है।

इसे देखकर सारे छात्र छात्राएँ  गर्वित होकर खुशी से ताली बजाते हुए कहने लगे ,  भारत की एकता अखंडता  आजादी पर हम आँच नहीं आने देंगे। 

तूफानों से निकाली इस कश्ती को हम अपने कँधों पर सँभाले रखेंगे।

तभी मौसी बोली शिक्षिका से बोली , इस दासता के  पिंजरे को हटा देती हूँ।

नहीं , यह  गुलामी की निशानी  नई नस्ल को संघर्ष से आजादी का प्रेरणा देगा। 


डॉ मंजु गुप्ता

वाशी , नवी मुंबई

 


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