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भारत के वीर सैनिक

 

आल्हा छंद -  भारत के वीर सैनिक

गीत  --- डॉ मंजु गुप्ता, वाशी , नवी मुंबई


साँसों की बाजी लग जाए,

सहता तन-मन लू की  पीर।

‘अंग - अंग अब फड़क रहा है’ ,

नस - नस में दौड़े रस वीर’।।

उड़ा दिया है बम से साथी,

टुकड़े - टुकड़े में वह देह।

चढ़ी भृकुटि दृग मंजर देखे,

भारत माता का था नेह।।

छलनी अपना  सीना करता,

नहीं युद्ध से भागे  हीर।

 अंग - अंग अब फड़क रहा है,

सूजी आँखों से बह नीर।।

नस - नस में दौड़े रस वीर’।।

जल – नभ अब धरा हिला देता,

दुश्मन को पल में दे मार।

नहीं बचेगा अरि- दल ज़िंदा,

भरे सिंह की वह हुंकार।।

अपनी जान लगा देता वह 

जख्मों से है भरा शरीर। 

अंग - अंग अब फड़क रहा है,

हाथ उठाई तब शमशीर।।

  नस - नस में दौड़े रस वीर’।।

कौंधी उसकी जब  पुतली थी,

वहीं बहाता खूनी धार।

 लहू पटी  रुंड - मुंड भू  थी,

 उसे पटकनी से दे मार।।

देश हेतु देता कुर्बानी,

लगे भाग्यशाली तकदीर।

अंग - अंग अब फड़क रहा है,

देख देश की नव तस्वीर।।‘ 

नस - नस में दौड़े रस वीर’।।

भारत गौरव ओढ़ तिरंगा,

जय - जय वंदे बोले वीर।

राष्ट्र मेव जयते का नारा,

रहा कब्र में सुन रणधीर।।

वर्दी उन्हें जान से प्यारी , फ़र्ज़ निभाए रण में वीर।

अंग - अंग अब फड़क रहा है,

 पराक्रमी मारे दृग तीर।।

 नस - नस में दौड़े रस वीर’।


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