डॉ मंजु गुप्ता
भारत की महिमा शुद्ध ध्वनि*- 32 मात्रिक
आँखों का तारा ,देश हमारा,जग से न्यारा,ताज लगे।
बोली हैं अनेक,भाषा सभी नेक,गंगा नदी एक,राज लगे।।
धोता चरण सिंधु,दिख भाल इंदु,जग लगे बंधु,मान करे।
करती देश गान ,हिमालय शान,झंडा महान,जान भरे।।
बहता गंगा जल,करता कलकल,देय अमृत फल,पाप हरे।
तुझको करूँ नमन,दिल से वंदन ,ले रज चंदन, जाप करे।।
जन्में कृष्ण- राम ,खुश सुबह शाम,रज खाय श्याम ,दंग करे।
करी रास - लीला , छैल छबीला,गोपी शीला, रंग भरे।।
थे वे अवतारी,तारी नारी,शबरी प्यारी,गले लगे।
दोनों लीला धर , देते प्रभु वर,अरि मर्दन कर भले लगे।।
वीर भूमि भारत , रचे इबारत ,शौर्य महारत , शक्ति भरे ।
धारे सत्य धर्म कर पुण्य कर्म ,दें प्रेम मर्म , भक्ति भरे।।
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