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आजादी के अमृत पर्व का भारत वीर

 

डॉ मंजु गुप्ता

आजादी के अमृत पर्व का भारत वीर


धारा बहती प्रेम की, आजादी के गीत ।

  देश भक्ति  धड़कन बसी,  हँसते गाते प्रीत।।

हँसते गाते , खुशी मनाते , आजादी में।

घर - घर झंडा, बाँधे गण्डा , हर वादी में ।।

भारत प्यारा, जन का तारा , देश हमारा।।

अमृत पर्व है , करें गर्व है , बहती धारा।।


सरहद पर हैं खड़े , सीना ताने वीर।

बनके मोर्चा भारती , अरि को मारे तीर।।

अरि को मारे , भरे हुंकारे, दुश्मन  भागे।

  ध्वजा हाथ में,  भक्ति साथ में, बाँधे धागे।।

भू अंबर पर , हर घर - घर पर, बजता अनहद।

बहती धारा , वंदे  नारा ,  गाता सरहद।।


 भारत गाता वीर की , गाथाओं का गान।

भक्ति धारा जन में बही  , आजादी की शान ।।

आजादी की , हर वादी की , तान निराली।

खुशियाँ छायी , भक्ति नहायी , फूटी लाली।

करते पूजा , वीर न दूजा , करते आरत।

अमृत पर्व है , देश गर्व है , करता भारत।।


 धारा रंगों में बही , तीन रंग की शान।

   शौर्य केसरी में बसा ,  यह वीरों की आन ।।

यह वीरों की , रण धीरों की , धरती प्यारी।

खूनी होली , अरि को गोली , दन - दन मारी।।

श्वेत शांति की , देश क्रांति की , तोड़ी कारा।

हुआ सवेरा , रवि का डेरा , बहती धारा।।

 


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