Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

आ जा साजन पास

 

आ जा साजन पास


सावन की ऋतु फिर से आयी, आजा साजन पास।

तेरी छवि बूँदों में छायी , पावस करे उदास।। 


 पावस की ऋतु है मतवाली , लगती दुनिया खास। 

भीग रहे  हैं धरती - अंबर , आए तन को रास।।

सपनों में झूमे है सावन ,  प्रेम करे परिहास।

तेरी छवि बूँदों में छायी,  पावस करे उदास।।


जलचर थलचर मिलने आतुर,दादुर करते शोर।

कब आओगे मेरे मधुकर,उर में नाचे मोर।।  

रिमझिम - रिमझिम बरखा बरसे,जगी मिलन की आस। 

तेरी छवि बूँदों में छायी,  मन को करे उदास।।

3

छम -छम करती बरखा पायल ,गाए गीत  समीर।

 करे बिजुरिया मन को घायल , तन -  मन उमड़े पीर।।

झर -झर झरी   व्यथा बादल की , रचे विरह इतिहास । तेरी छवि बूँदों में छायी,  पावस करे उदास।।


आग लगाए बरखा रानी, बरसे दृग से नीर ।

धोए  आँसू आँगन सारा , मेघ रहा जग चीर।।

 धड़कन में तेरी धुन बजती , मन में जागी प्यास।

तेरी छवि बूँदों में छायी, पावस करे उदास।।


डॉ मंजु गुप्ता

वाशी , नवी मुंबई

Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ