प्रेम की भूलभुलैया
डॉ मधुछन्दा चक्रवर्ती
प्यार में फँसी हुई लड़की
को अक्सर सब कुछ अच्छा लगने लगता है,
पूरी दुनिया पराई, प्रेमी अपना लगने लगता है।
जज्बातों का समंदर दिल में भरा रहता है,
वह सहमी-सहमी पूरी दुनिया को देखती रहती है।
छुपाती है सबसे अपने प्यार को,
पता चलने पर थोड़ा डरती है,
कोई पूछ ले तो शर्माकर रह जाती है,
कोई समझाए तो वह उसे ही दुश्मन मान लेती है,
नए-नए प्यार को वह अपनी दुनिया मान लेती है।
प्यार में फँसी लड़की, अपने भविष्य के सपने भूल जाती है,
नए-नए प्यार के साथ ही अपना भविष्य सजाने लगती है।
प्यार में फँसी लड़की माँ-बाप से डरती है,
दुनिया और समाज से डरती है,
सबको दुश्मन मानती है।
अक्सर प्यार में फँसी लड़की खुद को ही तकलीफ पहुँचाती है,
लोग उसके चरित्र पर आसानी से बातें बनाते हैं।
कोई देख ले उसे बाग में घूमता, तो उस पर गुस्सा जताते हैं,
बेफिक्र होकर जो वह रहा करती थी,
अब फिक्र में सारा-सारा दिन गुजारने लगती है।
लड़के बातें बनाते हैं कि अच्छी सेटिंग हो गई है,
लड़कियाँ कुछ उसकी निजी बातें जानने को उत्सुक रहती हैं।
कोई दूरी बनाती है, कोई अचानक बहुत अपनी हो जाती है,
प्यार में फँसी लड़की की दुनिया एकदम बदल जाती है!
प्यार में फँसी लड़की जब प्यार में हार जाती है,
दुनिया, जो अब तक फिक्र का दिखावा करती थी,
उसी को ही दोषी बना देती है।
ये प्यार क्या सच में ऐसा ही भूलभुलैया है?
इसमें फँसी लड़की सच में सब भूल जाती है?
दुनिया के कड़वे ताने,
समाज की जलील बातें,
दोस्तों की दूरियाँ—
क्या सच में देख कर भी अनजान हो जाती है?प्रेम की भूलभुलैया
प्यार में फँसी हुई लड़की
को अक्सर सब कुछ अच्छा लगने लगता है,
पूरी दुनिया पराई, प्रेमी अपना लगने लगता है।
जज्बातों का समंदर दिल में भरा रहता है,
वह सहमी-सहमी पूरी दुनिया को देखती रहती है।
छुपाती है सबसे अपने प्यार को,
पता चलने पर थोड़ा डरती है,
कोई पूछ ले तो शर्माकर रह जाती है,
कोई समझाए तो वह उसे ही दुश्मन मान लेती है,
नए-नए प्यार को वह अपनी दुनिया मान लेती है।
प्यार में फँसी लड़की, अपने भविष्य के सपने भूल जाती है,
नए-नए प्यार के साथ ही अपना भविष्य सजाने लगती है।
प्यार में फँसी लड़की माँ-बाप से डरती है,
दुनिया और समाज से डरती है,
सबको दुश्मन मानती है।
अक्सर प्यार में फँसी लड़की खुद को ही तकलीफ पहुँचाती है,
लोग उसके चरित्र पर आसानी से बातें बनाते हैं।
कोई देख ले उसे बाग में घूमता, तो उस पर गुस्सा जताते हैं,
बेफिक्र होकर जो वह रहा करती थी,
अब फिक्र में सारा-सारा दिन गुजारने लगती है।
लड़के बातें बनाते हैं कि अच्छी सेटिंग हो गई है,
लड़कियाँ कुछ उसकी निजी बातें जानने को उत्सुक रहती हैं।
कोई दूरी बनाती है, कोई अचानक बहुत अपनी हो जाती है,
प्यार में फँसी लड़की की दुनिया एकदम बदल जाती है!
प्यार में फँसी लड़की जब प्यार में हार जाती है,
दुनिया, जो अब तक फिक्र का दिखावा करती थी,
उसी को ही दोषी बना देती है।
ये प्यार क्या सच में ऐसा ही भूलभुलैया है?
इसमें फँसी लड़की सच में सब भूल जाती है?
दुनिया के कड़वे ताने,
समाज की जलील बातें,
दोस्तों की दूरियाँ—
क्या सच में देख कर भी अनजान हो जाती है?
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