परी, टीवी और एक सीख
डॉ. मधुछन्दा चक्रवर्ती
बैंगलोर कर्नाटक
8217797037
एक था प्यारा सा गाँव, और वहाँ एक छोटी सी क्यूटी सी बच्ची रहती थी, जिसका नाम था मिंचू। मिंचू थी तो बहुत प्यारी, पर कभी-कभी वह बहुत शरारत करती थी और जब उसकी बात नहीं मानी जाती थी तो वह अपना गुस्सा भी दिखाती थी। आजकल मिंचू को सुबह-शाम टीवी देखने की बुरी आदत लग गई थी। टीवी पर आने वाले कार्टून्स को देख-देख कर वह वैसी ही ज़िद्दी और तेज़ हरकतें सीखने लगी थी।
एक दिन सोमवार की दोपहर थी। खाना खाने के बाद मिंचू ने अपनी पड़ोस में रहने वाली सहेली क्यूटी को बुलाया और दोनों घर से पार्क में खेलने के लिए भाग खड़ी हुईं।
क्यूटी की मम्मी ने दूर से ही आवाज़ लगाकर रोका, "बेटा, मत जाओ! धूप है, ऐसे मत दौड़ो!" और घर में माँ ने भी प्यार से समझाया था कि अकेले मत भागो। पर टीवी के कार्टून्स में जैसे हीरो लोग बिना डरे दौड़ते थे, वैसा ही करने का भूत मिंचू के सर पर सवार था। दोनों बच्चियों ने किसी की बात नहीं सुनी और तेज़ी से दौड़ने लगीं।
दौड़ते-दौड़ते अचानक आपस में ज़ोरदार टक्कर हो गई! क्यूटी के सर पर चोट लग गई और मिंचू के सामने के दाँत पर ज़ोरदार चोट आई। मिंचू के वह दूध के दाँत थे, जिनके गिरने का अभी सही समय भी नहीं हुआ था क्योंकि वह अभी सिर्फ़ 5 साल की थी। चोट लगते ही ख़ून सा दिखने लगा और दोनों ज़ोर-ज़ोर से रोने लगीं।
रोते-रोते मिंचू भागती हुई घर आई। माँ ने जब उसका यह हाल देखा तो पहले उन्हें बहुत गुस्सा आया और उन्होंने मिंचू को थोड़ा डाँटा कि, "मैंने मना किया था न कि ऐसे मत दौड़ो, और बड़ों की बात क्यों नहीं सुनती हो?"
पर जब माँ ने देखा कि उनकी 5 साल की बेटी के दाँत में कितनी चोट लगी है और वह दर्द से तड़प रही है, तो माँ का दिल पिघल गया। माँ ने तुरंत उसे प्यार से पुचकारा, अपने सीने से लगाकर गोद में बिठा लिया और उसके आँसू पोंछे।
फिर माँ जल्दी से डॉक्टर के पास गईं, डॉक्टर ने चेक करके दवाई और मरहम दिया। माँ ने घर आकर वैसे ही दवा लगाई और प्यार से खाना खिलाया।
उस दिन के बाद से मिंचू समझ गई कि टीवी में दिखाए जाने वाले हर करतब को असली ज़िंदगी में नहीं करना चाहिए। उसने वादा किया कि अब वह न तो टीवी देखकर बुरी आदतें सीखेगी और न ही कभी घर में बड़ों की बात अनदेखा करेगी।
सीख: बच्चों को हमेशा घर में बड़ों की बात माननी चाहिए। टीवी पर दिखने वाली हर नकल या बुरी आदत को अपनाने से बचना चाहिए, क्योंकि लापरवाही का नतीजा हमेशा नुक़सान और दर्द ही देता है।
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