Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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शंख

 
1. शंख

एक लड़का रेत पर लिख रहा था  
कर्ण का दान,  
भीष्म का प्रण,  
द्रौपदी का चीरl  
हर अक्षर के साथ  
लहरें मिटा देती थीं  
पूरी एक युद्धभूमि।  
मैंने पूछा—क्यों लिखते हो  
जो टिकेगा नहीं? 
उसने उंगली डुबोई रेत में
खोदा गहरा
नम रेत से निकला एक शंख,  
बोला—सुनो 
यही आवाज़ है  
धर्म और अधर्म की लड़ाई की  
जो हर युग में  
रेत की तरह हिलती है 
पर शंख की तरह गूँजती है।

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