Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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मुट्ठी में सागर

 

मुट्ठी में सागर


मीना कुमारी, जीनत अमान, 
जया बच्चन और मैं।
मैं एक साधारण नारी
हम सभी तरसते रहे 
उम्र भर अपने प्रेम को 
पाने के लिए 
पर प्रेम को पाना 
सागर को मुठ्ठी में भरने 
जैसा होता है।
जो पास में होकर भी 
प्यास नहीं बुझाता है।
सुनाई देता है केवल शोर
दूर-दूर तक अपना 
कोई नहीं होता।
फिर भी जीना होता हैं।
क्यों जीना होता है।
मेरे प्रश्नों का प्रतिउत्तर बनकर
सूर्य तेज चमकता है और 
कभी बादल में मुंह छुपाता है।
एक छोटा-सा सागर 
आंखों में भर जाता है।
आह! प्रेम को पाना 
कितना मुश्किल होता है।

डॉ. इन्दुमति सरकार

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