साधु महाराज
गांव में साधु महाराज नये आये थे, जिनके ज्ञान और आकर्षक व्यक्तित्व से सब लोग प्रभावित हुए। गांव के लोगों ने उसे मंदिर की पूजा -अर्चना के लिए रख लिया और रहने के लिए मंदिर की खाली कोठरी भी दे दी।
साधु महाराज की ख्याति गांव और आस-पास के इलाकों में फैलने लगी। लोग अपनी तकलीफें, उलझनें लेकर आते और साधु बाबा उसके उपाय बताते। गांव में कोई भी प्रश्न उपस्थित होता तो लोग साधु बाबा के पास जाते,उनकी सलाह मानते। साधु बाबा सबके दिलोदिमाग में छा गये।
मोहन की पत्नी शीला बड़ी धार्मिक और भक्ति -भावना में आस्था रखती थी। वह हररोज मंदिर में जाती, भगवान के दर्शन करती और साधु बाबा को दान-दक्षिणा देती तब अन्न जल ग्रहण करती। कभी अवकाश के समय में सत्संग भी किया करती।साधु बाबा के ज्ञान और व्यक्तित्व से इतनी प्रभावित थी कि अहर्निश उनका बखान किया करती थीं।
मोहन शाम के समय हक्का-बक्का-सा अपनी पत्नी को ढूंढ रहा था। कहा कि , सुबह से शीला घर वापस नहीं आईं। लोगों ने सहानुभूति जताते हुए कहा -'जाकर साधु महाराज को पूछो, वे बता देंगे कि तुम्हारी पत्नी कहां है।'
मोहन भागता हुआ मंदिर के अहाते में पहुंचा। साधु महाराज की कोठरी खुली थी, और उनका सामान भी नहीं था, साधु महाराज भी गायब थे।
शायद.....
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