थाईलैंड की अयुत्या और अयोध्या
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थाईलैंड के अयुत्या शहर को अयोध्या से जोड़ा जाता है । क्योंकि ये शहर भारत के अयोध्या जैसा ही है । यहां भी भगवान राम के प्रति भक्ति व आस्था है । थाईलैंड के राजाओं को रामातिबोधि की उपाधि दी जाती है । जिसका मतलब है अधिपति राम । अयुत्या में हिंदू और बौद्ध दोनों धर्म के मंदिर हैं ।
आयुत्यायन वंश के राजाओं को भगवान राम का अवतार माना जाता है । थाईलैंड की राष्ट्रीय पुस्तक रामायण है और थाईलैंड में रामायण को रामकिएन कहा जाता है । जिस तरह भारत में अयोध्या सरयू नदी के किनारे बसा है, उसी तरह भारत के करीब 3500 किलोमीटर दूर थाईलैंड का अयुत्या शहर भी तीन तरफ से तीन नदियों से घिरा हुआ है । थाईलैंड जो चाओ फ्राया नदी के किनारे बसा है ।
भारतीय मूल के प्रोफेसर सूरतहोरा चाय कुल बैंकॉक की यूनिवर्सिटी में इंडियन स्टडीज के फाउंडर डायरेक्टर है । वे लिखते हैं –" अयोध्या और अयुत्या का नाम में सामान्य होना कोई इत्तेफाक नहीं है । संस्कृत के शब्दो को थाई में ढाल कर यहां नये नाम बनते आए हैं ।" प्रोफेसर आगे लिखते हैं " जिस तरह में हमारे यहां राजा को विष्णु का अवतार माना जाता था । उसी तरह थाईलैंड के राजाओं को रामा
–1, रामा –2, रामा –3–––रामा –10 आदि नामो से जाना जाता है ।
संस्कृत पालि आदि भाषाओं का असर थाईलैंड की भाषाओं से दिखता है ।
दक्षिण पूर्व एशिया मामलों के जानकार और एमपी .आई .डी .एस. ए.से जुड़े डाक्टर उदय भानु जी लिखते हैं – इस वर्ष भारत और थाईलैंड के कूटनीतिक रिश्तों को 70 साल हो जाएंगे । दोनों देशों के बीच संस्कृतिक व धार्मिक संबंध सदियों से हैं । थाइलैंड के अयुत्या की स्थापना राजा रामाती बोधी – 1 ने 1350 ई में की थी ,जो आज यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी है ।
थाईलैंड के शाही परिवार ने हिंदू धर्म से जुड़ी कई कृतियों को अपनाया हुआ है । इसका तथ्य ये है कि सदियों पहले दक्षिण भारत से समुद्र के जरिए लोगों का थाईलैंड आना जाना हुआ और रामायण भी वहां पहुंची । इसके कई संस्करण बनते गए और फिर थाई किंग रामा प्रथम ने इसे फिर से लिखा और रामाकिएन नाम दिया । जिसका आज भी वहां मंचन होता है । रामाकिएन के मंचन में थाकसन नाम का किरदार वही है जो रामायण में रावण का है । यहां थास का अर्थ दास माना जाता है और फ्रा राम वही है जो रामायण में भगवान राम हैं ।
रॉयल थाई काउंसलेट जनरल के अनुसार 13 जनवरी 1872 को थाईलैंड के किंग रामा 5 समुद्र के रास्ते कोलकाता पहुंचे फिर ट्रेन के जरिए बैरकपुर ,दिल्ली ,आगरा, कानपुर और लखनऊ भी गए ।
थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक का यह असल नाम न होकर लंबे समय से अयुत्या बैंकॉक के औपचारिक नाम में आज भी शामिल है । शहर के बीचो-बीच सबसे चौड़ी रोड भी अयुत्या नाम से ही है।
थाईलैंड का की इमारतो में अधिकांशतह 17 में एवं 18वीं सदी के भारत की कलात्मक शैली का झलक मिलता है ,और संस्कृति व परंपराओं में भारत की छाप है । लेखक ऐस एन देसाई
" हिंदुइज्म इन थाई लाइफ" पुस्तक में लिखते हैं –" थाइलैंड में अयुत्या शहर भगवान राम के आसर का साक्षी है ,जबकि थाईलैंड में राम को लेकर पुरातत्व से जुड़ा प्रमाण नहीं है । लेकिन लोक कला के जरिए राम और रामायण सदियों से लोगों की तक पहुंच रही है । थाईलैंड में एक और शहर है लोक बुरी जो भगवान राम के बेटे लव के नाम पर मानी जाती है । इसी शहर में एक गली का नाम भी फ्रा यानी राम है । 18 वीं सदी के अंत में वर्मा द्वारा तहस नहस की जा चुकी थाईलैंड की अयुत्या अब विश्व धरोहर की सूची में शामिल है की जा चुकी है । इसके अलावा भारत के राम जन्मभूमि निर्माण न्यास ने यहां साल 2018 में यहां के एक भव्य राम मंदिर काम का निर्माण भी कराया था । ये इसलिए भी आवश्यक था क्योंकि थाईलैंड के इस स्थान की लोकप्रियता चकरी राजवंश का इतिहास और जनमानस के बीच राम की प्रसिद्धि भारत के बहुत से पर्यटकों को आकर्षित करती है।
एक तथ्य भी है कि थाइलैंड में वाल्मीकि द्वारा लिखी रामायण को ही माना जाता है । थाईलैंड में हिंदुओं का वर्चस्व है ।यह स्थान यानी अयुत्या छोप्रया पालाक एवं लोबा पुरी नदियों के बीच है और इसका नाम भी भारत के अयोध्या से प्रेरित अयुत्या है ।
थाईलैंड की अयुत्या का मुख्य आकर्षण केंद्र शहर के मध्य स्थित प्राचीन पार्क,है1 इस पार्क में बिना शिखर वाले खंबे दीवारें सीढ़ियां एवं भगवान बुद्ध की खूबसूरत प्रतिमाएं लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां सबसे खास प्रतिमा बुद्ध की ही है जिसमें बुद्ध का सर से सेंडस्टोन से बनाया गया है और एक पीपल के वृक्ष की जड़ों से प्रतिमा को जकड़ा हुआ है। यह वृक्ष अयोध्या में वट महाथाट यानी14वीं शताब्दी के मंदिरों के अवशेषों से मिलता जुलता है।
थाईलैंड की अयोध्या में हिंदू मंदिरों के अनेकों खंडहर आज भी मौजूद हैं । ब्रह्मा विष्णु और महेश इन तीनों की समर्पित पूजा स्थल अभी भी थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक से केवल 50 किलोमीटर दूर ही है। अयुत्या आज भी अपने गौरवशाली इतिहास को खुद में समेटे हुए हैं।
थाईलैंड के अयुत्या को रामायण के उसे प्रसंग से भी जोड़ा जाता है जब अयुत्या को श्री राम की राजधानी बताया गया था । भारत के लोगों की तरह अयुत्या से में भी अयोध्या की तरह भगवान राम के प्रति भक्ति बेहद अटूट है इस स्थान के हिंदू मंदिरों के खंडहर इस आध्यात्मिक और धार्मिक संबंध के अमिट प्रमाण है ।
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डॉ अर्चना प्रकाश
गोमती नगर, लखनऊ
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