मैं अयोध्या हूं !
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मैं अयोध्या हूं !
अवध साकेत कौशल हूं ।
आई धरा पर स्वर्ग से
विष्णु चक्र पर विराजती हूं ।
सप्त पुरियों में प्रथम हूं ,
मैं अयोध्या हूं ।
जैन बौद्ध उपदेश सदा,
प्रतिध्वनित मुझ में होते ।
पुण्य सरयू से सिंचित हूं ,
प्रभु राम की जन्म भूमि हूं ।
ब्रह्मलीन सर्वदा ही हूं ।
हां मैं अयोध्या हूं ।
दिव्य भवन भुजाएं मेरी ,
विश्वकर्मा से निर्मित हूं ।
वशिष्ठ से अभिषिक्त हूं ,
श्री राम की अद्भुत लीलाएं
अंतस में मेरे धारती हूं ,
मैं अयोध्या हूं ।
धर्म आध्यात्म वस्त्र मेरे,
संस्कृतियों की है ओढ़नी,
हां मैं अयोध्या हूं ।
युद्ध विरत कर्मरत रहती।
भक्तों की आस्था का प्राण हूं ।
कण कण सिया राम मय हूं ।
मैं अयोध्या हूं ।
मैं ओंकार शून्य भी मैं
होकर मही सौरमंडल हूं ।
मैं पाणिनी अष्टाध्याई हूं
वेद पुराण उपनिषदों का ,
सकल विश्व में उद्घोष करूं ,
मैं अयोध्या हूं ।
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डॉ अर्चना प्रकाश
गोमतीनगर ,लखनऊ
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