Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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मैं अयोध्या हूं

 
   मैं अयोध्या हूं !
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           मैं अयोध्या हूं !
      अवध साकेत कौशल हूं ।
       आई धरा पर स्वर्ग से 
      विष्णु चक्र पर विराजती हूं ।
      सप्त पुरियों में प्रथम हूं ,
          मैं अयोध्या हूं ।
     जैन बौद्ध उपदेश सदा,
     प्रतिध्वनित मुझ में होते ।
     पुण्य सरयू से सिंचित हूं ,
     प्रभु राम की जन्म भूमि हूं ।
     ब्रह्मलीन सर्वदा ही हूं ।
        हां मैं अयोध्या हूं ।
    दिव्य भवन भुजाएं मेरी ,
    विश्वकर्मा से निर्मित हूं ।
    वशिष्ठ से अभिषिक्त हूं ,
    श्री राम की अद्भुत लीलाएं
    अंतस में मेरे धारती हूं ,
         मैं अयोध्या हूं ।
    धर्म आध्यात्म वस्त्र मेरे,
    संस्कृतियों की है ओढ़नी,
         हां मैं अयोध्या हूं ।
    युद्ध विरत कर्मरत रहती।
   भक्तों की आस्था का प्राण हूं ।
    कण कण सिया राम मय हूं ।
          मैं अयोध्या हूं ।
मैं ओंकार शून्य भी मैं 
होकर मही सौरमंडल हूं ।
मैं पाणिनी अष्टाध्याई हूं 
वेद पुराण उपनिषदों का ,
सकल विश्व में उद्घोष करूं ,
     मैं अयोध्या हूं ।
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       डॉ अर्चना प्रकाश 
  गोमतीनगर ,लखनऊ 




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