आज के परिप्रेक्ष्य में उपनिषदों का महत्व
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उपनिषद हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं । इस ग्रंथ में ब्रह्म यानी ईश्वरीय सत्ता के स्वभाव और आत्मा के बीच अंतर संबंध की दार्शनिक व्याख्या की गई है । उपनिषद ही भारतीय दर्शन का आधार है । वेदांत साख्य जैन या फिर बौद्ध दर्शन आदि सभी में परम ज्ञान परम विद्या और इस लोक की परिधि से बाहर की बातें की गई हैं ।
उपनिषद देववाणी संस्कृत में लिखे गए हैं । इनकी भाषा शैली भी गद्य व पद्य दोनों में है । उपनिषदों में गुरु शिष्य के बीच संवाद को प्रकट किया गया है । प्रसिद्ध इतिहासकार मैक्स मूलर ने इन उपनिषदों का अनुवाद किया था । मुगल काल में दारा शिकोह ने फारसी भाषा में उपनिषदों का अनुवाद किया था । मूल रूप से उपनिषदों की संख्या 108 है जिनमें 10 को प्रमुख माना जाता है।
लेखक महेश शर्मा के अनुसार " उपनिषद वेद का ज्ञान कांड है। यह चिर प्रदिप्त वह ज्ञान दीपक है ,जो सृष्टि के आदि से प्रकाशमान है और शाश्वत व सनातन है ।"
शास्त्रों में ऐसा कहा गया है की चौरासी लाख योनियों की नैया पार करने के बाद मनुष्य जीवन प्राप्त होता है । ऐसे में यदि मनुष्य को मोक्ष प्राप्त करना है तो वह ज्ञान उपनिषदों में ही मिलेगा ।
वास्तव में उपनिषद का अर्थ है नीचे बैठकर सुनना, हजारों साल पहले ऋषि मुनि अपने छात्रों को उपदेश देते थे । जिसमें आत्मा परमात्मा सृष्टि जीव आराधना मोक्ष आदि महान विषयों पर व्याख्या है ।
इसलिए उपनिषद पढ़ने से हमें ईश्वर का महत्व ,जीवन का महत्व ,जीवन का लक्ष्य आदि विषय ज्ञात होते हैं। जो जीवन जीने के लिए बेहद सहायक होते हैं । उपनिषदों के सूत्र वाक्य हमें अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश में ले जाते हैं जैसे –
" असतो मां सद गमय ।
तमसो मा ज्योतिर्गमय ।।"
उपनिषदों में छिपे हैं वह जीवन मूल्य जो स्वावलंबन व स्वाभिमान की भावनाएं जागृत करते हैं ।
कठोपनिषद के अमर वाक्य " उतित्ष्ठ जागृत प्राप्य वरन्निबोधत । " को अपने जीवन में आत्मसात कर स्वामी विवेकानंद ने संपूर्ण भारतवर्ष की सोई हुई युवा शक्ति में आध्यात्मिक स्वालंबन एवं स्वाभिमान की भावनाओं को जागृत किया था ।
स्वामी विवेकानंद कहा कि –" उपनिषदों में ऐसी शक्ति का भंडार है जो संपूर्ण विश्व को बल , शौर्य व नवजीवन प्रदान कर सकता है । " संत विनोबा भावे लिखते हैं– " उपनिषदों की महिमा अनेकों ने गाई है, उपनिषद कोई साधारण पुस्तक नहीं है वह समग्र जीवन दर्शन है ।"
मानव जीवन के लिए जो कुछ भी इष्ट ,कल्याणकारी , शुभ व आदर्श है । उसे उपनिषद प्रमुखता से प्रदान करते हैं । उपनिषद हमें धर्म अर्थ काम व मोक्ष चारों पुरुषार्थों से अलंकृत करते हैं । श्रेष्ठ आचरण, ज्ञान ,सत्य, तप, दान व त्याग की भावना आदि अनेक उत्तम जीवन मूल्य है, जो ईशोपनिषद के प्रथम मंत्र में जीवन मूल्य को स्थापित करते हैं ।
उपनिषदों में वर्णित चिरंतन मूल्य मानव जीवन को स्थायित्व प्रदान करने के साथ लोक बंधुत्व व विश्व बंधुत्व को जागृत करता है । मातृ देवो भव ,पितृ देवो भव, यह कनेप निषद के सूत्र सामाजिक समरसता के स्रोत हैं ।
कठोपनिषद में यमाचार्य कहते हैं न विततेन तर्पणयों मनुष्य: । अर्थात धन से मनुष्य कभी भी तृप्त नहीं होता ।
उपनिषद चिंतनशील ऋषियों की ज्ञान चर्चाओं का सार है । मानव जीवन के उत्थान के समस्त उपाय उपनिषदों में वर्णित हैं । ईश ,केन ,कठ, प्रश्न, मुंडक मांडूक्य ऐतरेय , तैतरीय, छादोग्य, श्वेताश्वतर, बृहदारण्यक –इन 11 प्रमाणिक उपनिषदों में स्वर्णिम मानव जीवन मूल्यों का वर्णन उपलब्ध है । आदि गुरु शंकराचार्य ने इन्हें प्रमाणिक मानकर ही इनका भाष्य किया था।
संसार में रहते हुए भौतिक पदार्थों के भोग के साथ त्याग की भावना का सूत्र उपनिषद में जीवन के कल्याण का सूत्र है। सत्यम वद ,धर्मम चर जैसे उपनिषद के वेद वाक्यों द्वारा अनुसरणीय मूल्यों का पालन करके परिवार तथा समाज के वातावरण को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है ।
वृहदारण्यक उपनिषद् में प्रजापति द्वारा दमन अर्थात आत्म नियंत्रण की ,दान की भावना तथा दया एवं करुणा की भावना को चिरंतन मूल्य के रूप में समावेशित किया गया है । क्योंकि व्यक्ति की प्रतिष्ठा का आकलन उसके जीवन मूल्यों से किया जाता है ।
उपनिषदों के स्वर्णिम चिंतन ने पाश्चात्य जगत की बड़े-बड़े तत्वज्ञ विद्वानों को प्रभावित किया है । महान दार्शनिक शोपेन हावर का कहना था – "मृत्यु के भय से बचने , मृत्यु की पूरी तैयारी करने , ब्रह्म को जानने के इच्छुक जिज्ञासुओं के लिए उपनिषदों के अतिरिक्त कोई अन्य मार्ग मेरी दृष्टि में नहीं है ।"
जीवन के सुख-दुख , उदासी के मौकों पर उपनिषद हमें राह दिखाते हैं ।
ऑफिस पॉलिटिक्स में भी उपनिषद सहायक होते हैं ।
छोटी-छोटी कथाओं के माध्यम से उपनिषद बड़ी और गूढ़ बातों का को सहजता से समझाते हैं । यह उपनिषदों का ही प्रभाव है कि भारत में आज भी समाज नाम की संस्था बिना कार्यालय के सुचारू रूप से चल रही है ।
आज जब चारों तरफ आतंकवाद गैंग रेप घोटाले की राजनीति में मानवता सिसक रही है , बच्चों का बचपन निराशा के अंधकार में घिरा हुआ है , ऐसे में उपनिषदों के वेद वाक्य ही व्यक्ति को सद्बुद्धि व सन्मार्ग के लिए प्रेरित करते हैं । उपनिषद ही आज के स्वस्थ समाज व जगत की दृढ़ आधारशिला है । आज भारत विश्व गुरु बन चुका है और पूरा विश्व उन्नति और प्रतिष्ठा के लिए भारत की ओर टकटकी लगाए देख रहा है ।
संदर्भ :–
1. हिंदुधर्मकथा.कॉम
2, जागरण.कॉम
डाo अर्चना प्रकाश
मो– 9450264638
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