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योग

 

Sushil Kumar 


Sat, Jun 20, 8:37 AM (21 hours ago)




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योग

निज स्वास्थ्य के लिये, योग को अपनाइये,
मानव कल्याण हित, योग को बतलाइये।
सर्वे सन्तु निरामया, है संस्कृति का आधार,
स्वस्थ तन का आधार, योग को समझाइये।

योग, संगीत और जीवन, सबका समन्वय चाहिये,
खान पान- नियम संयम, सबका समन्वय चाहिये।
सत्य आचरण, आहार विहार, व्यायाम से जोड़िये,
स्वस्थ तन हो निर्मल मन, सबका समन्वय चाहिये।

तन से मन की यात्रा, ध्यान से सम्पूर्ण होती,
मन से ब्रह्म की यात्रा, योग से परिपूर्ण होती।
शिव ने सिखाया योग, पतंजलि ने सूत्र रचे,
आत्मा जानने की यात्रा, समन्वय से पूर्ण होती।

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन



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