Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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साल/ वर्ष

 
साल/ वर्ष

ठिठुरती ठंड में मुझको निकाला गया,
बूढ़ा बताकर मुझको निकाला गया।
नये साल के स्वागत में जश्न मनाते,
बीता साल कह मुझको निकाला गया।

उपलब्धियों को मेरी, कैसे मिटा पाओगे,
काल के भाल पर लिखा, कैसे मिटा पाओगे?
दर्ज हो गये जो किस्से, इतिहास के पन्नों पर,
राणा- शिवा- लक्ष्मी को, कैसे मिटा पाओगे?

मेरी कोख से ही नये साल का जन्म होता है,
मेरी उपलब्धियों भविष्य निर्धारण होता है।
योजनाएं जो बनी थी राष्ट्र के विकास हित,
योजनाओं का मूल्यांकन नव वर्ष में होता है।

अ कीर्ति वर्द्धन

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