वृक्षारोपण
बहुत से मित्र विकास के नाम पर काटे जा रहे वृक्षों को लेकर चिन्तित हैं। उनकी चिन्ता निराधार नही है। बढती गर्मी, फैलता प्रदुषण तथा घटती जल-वायु की विकराल समस्या से हम सब अवगत हैं। सरकार का एजे़ंडा जनता को बेहतर सुविधा देने का रहता है जिसमें भौतिक विकास के लिये सबके प्रयास रहते है। हम पेड काटने वालो को गाली देते हैं मगर घर, दफ्तर में ए सी, कार में चलना, भीड रहित चौडी बडी सडके न हो तो सरकार को गाली देते हैं।
हम जितने भी लोग पेड काटने पर शोर मचाते हैं, वह सब बतायें आज तक कितने नये पौधे रौपे है?
इस वर्ष अभियान चलायें कि अपने आसपास, नदियों, नहरो, तालाबों सडको के किनारे अधिक से अधिक पौधे लगायें। छोटे बच्चों को जागरूक करें।
अपने जन्मदिन, शादी के अवसर पर, किसी प्रिय की स्मृति में पौधे लगायें।
हम विकास की राह और अपने स्वार्थ के कारण वृक्षों को काटने से तो नही बचा सकते मगर उससे अधिक संख्या में नया रोपण कर समस्या से लड सकते हैं।
बेहतर हो हम सब आरोप प्रत्यारोप छोडकर नवनिर्माण की और अग्रसर रहते हुये सघन वृक्षारोपण करें।
निर्माण के लिये अवसान, होना जरूरी है,
सुबह के लिये शाम, का होना जरूरी है।
बढती जरूरतें अपनी, विकास भी चाहिये,
संतुलन रहे नये वृक्षो का होना जरूरी है।
डॉ
बहुत से मित्र विकास के नाम पर काटे जा रहे वृक्षों को लेकर चिन्तित हैं। उनकी चिन्ता निराधार नही है। बढती गर्मी, फैलता प्रदुषण तथा घटती जल-वायु की विकराल समस्या से हम सब अवगत हैं। सरकार का एजे़ंडा जनता को बेहतर सुविधा देने का रहता है जिसमें भौतिक विकास के लिये सबके प्रयास रहते है। हम पेड काटने वालो को गाली देते हैं मगर घर, दफ्तर में ए सी, कार में चलना, भीड रहित चौडी बडी सडके न हो तो सरकार को गाली देते हैं।
हम जितने भी लोग पेड काटने पर शोर मचाते हैं, वह सब बतायें आज तक कितने नये पौधे रौपे है?
इस वर्ष अभियान चलायें कि अपने आसपास, नदियों, नहरो, तालाबों सडको के किनारे अधिक से अधिक पौधे लगायें। छोटे बच्चों को जागरूक करें।
अपने जन्मदिन, शादी के अवसर पर, किसी प्रिय की स्मृति में पौधे लगायें।
हम विकास की राह और अपने स्वार्थ के कारण वृक्षों को काटने से तो नही बचा सकते मगर उससे अधिक संख्या में नया रोपण कर समस्या से लड सकते हैं।
बेहतर हो हम सब आरोप प्रत्यारोप छोडकर नवनिर्माण की और अग्रसर रहते हुये सघन वृक्षारोपण करें।
निर्माण के लिये, अवसान होना जरूरी है,
सुबह के लिये, शाम का होना जरूरी है।
बढती जरूरतें अपनी, विकास भी चाहिये,
संतुलन रहे, नये वृक्षों, का होना जरूरी है।
डॉ
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