विश्व मिट्टी दिवस
जकड़ लेती जिस तरह, जड़ों को मिटृटी खेत की,
गिरने नहीं देती वृक्ष को, धरा पर मिट्टी खेत की।
उसी तरह जकड़ा हुआ हूँ, दुखः सुख तकलीफ से,
बिखरने नहीं देती वुजूद, संस्कारों की मिट्टी खेत की।
मिट्टी में ही अन्न उगता, जिसको खाकर पलते हैं सब,
मिट्टी में ही मिलते हम सब, मिट्टी मिट्टी हो जाते हैं सब।
अधिक उत्पादन स्वार्थ की खातिर, क्यों जहर मिलाते,
जहर तुम्हारे अन्न में आता, जिसको खाते हम हैं सब।
आओ मिलकर हम सब, संकल्प अभियान चलायें,
देशी खाद का प्रयोग करें, रसायनिक खाद बिसरायें।
कम से कम निज परिवार हित, थोड़ा तो उपजायें,
विश्व मिट्टी दिवस अवसर पर, सबको यह समझायें।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन

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