सूनी सी आँखें, उदासी का सबब लिख दो,
प्यार की इन्तिहां, इंतज़ार की हद लिख दो।
खुली हैं आँखें मरने के बाद भी, इंतज़ार में,
पहले मिलन का वादा, वो उमंग लिख दो।
जाने कितने किस्से और कहानी चलती हैं,
कुछ दिमाग मे कुछ हकीकत में पलती हैं।
लुंज पुंज हो जाये काया, नहीं उमंग मन में,
नहीं चाहतें हो जीने की उम्र तब ढलती है।
हो चाहत मिलन की, उम्र बाधा नहीं बनती,
प्रेयसी से मिलन की, बाधा बाधा नहीं बनती।
आँधी तूफां ज़लज़ले हों, मजनू कब रोके रूके,
उल्लास जीवन में हो, पतझड़ बाधा नहीं बनती।
आँख गडाये खिड़की पर हम, राह तक रहे उनकी,
नही कोई वादा मिलने का, आस बनी है फिर भी।
शायद कोई हवा का झोंका, उनका संदेश सुना दे,
इसी आस में जगी रात भर, आहट हो उनके आने की।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
प्यार की इन्तिहां, इंतज़ार की हद लिख दो।
खुली हैं आँखें मरने के बाद भी, इंतज़ार में,
पहले मिलन का वादा, वो उमंग लिख दो।
जाने कितने किस्से और कहानी चलती हैं,
कुछ दिमाग मे कुछ हकीकत में पलती हैं।
लुंज पुंज हो जाये काया, नहीं उमंग मन में,
नहीं चाहतें हो जीने की उम्र तब ढलती है।
हो चाहत मिलन की, उम्र बाधा नहीं बनती,
प्रेयसी से मिलन की, बाधा बाधा नहीं बनती।
आँधी तूफां ज़लज़ले हों, मजनू कब रोके रूके,
उल्लास जीवन में हो, पतझड़ बाधा नहीं बनती।
आँख गडाये खिड़की पर हम, राह तक रहे उनकी,
नही कोई वादा मिलने का, आस बनी है फिर भी।
शायद कोई हवा का झोंका, उनका संदेश सुना दे,
इसी आस में जगी रात भर, आहट हो उनके आने की।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन

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