तुमसे तो बहुत मिले, पर तुम न मिले,
पुष्प तो बहुत खिले, पर दिल न खिले।
चाहत थी तुम्हारी, उम्र भर तलाशा भी,
गुनगुनाना चाहा तेरे नग्मे, लब न हिले।
भेजे थे ख़त पुराने, पते पर नहीं मिले,
ख़त पर लिखा आया, पते पर नहीं मिले।
जाता हूँ तेरी गलियों में दीदार हो जाये,
लौट आता सदा बैरंग, पते पर नहीं मिले।
हैं आस अभी बाक़ी, एक दिन मिलोगे,
हक़ीक़त मे नहीं तो, ख़्वाब में मिलोगे।
आती है हिचकी, तेरे नाम से बन्द होती,
याद तेरी मेरे दिल में, कहीं तो मिलोगे।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन

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