
| Thu, Nov 27, 10:21 AM (20 hours ago) |
श्री विजय राठौर जी (जाँजगीर छत्तीसगढ़) का रचना संसार बहुत विपुल है। साहित्य की प्रत्येक विधा में आपने सृजन किया है। आपके जीवन यात्रा के पचहत्तर पड़ाव पूर्ण होने पर मित्रों व शुभचिंतकों ने आपके कार्यों का समग्र मूल्यांकन करने का निर्णय किया। जिसके लिये संपादक के तौर पर श्री अश्विनी कुमार आलोक जी को दायित्व दिया गया।
विजय राठौर व्यक्ति और अभिव्यक्ति- समग्र मूल्यांकन नानक इस विशाल ग्रंथ में देश विदेश के जाने माने इक्यावन साहित्यकारों ने अपनी विहंगम दृष्टि से राठौर जी के साहित्य का विलोडन किया और नवनीहआपके सम्मुख है।
मुज़फ़्फ़रनगर से डॉ अ कीर्ति वर्द्धन तथा डॉ राकेश कुमार कौशिक जी को भी उनके साहित्य पर अपने विचार रखने का अवसर मिला।
सजल की सरगम नाम से हमने धूप की चिट्ठियाँ नामक सजल संग्रह पर अपना दृष्टिकोण सामने रखा।
लगभग पैंतालीस पुस्तकों के प्रणेता विजय जी निरंतर स्वस्थ रहते हुऐ साहित्य सृजन करते रहें, हमारी अशेष शुभकामनाएँ।
डॉ अश्विनी कुमार आलोक जी को इस वृहत ग्रन्थ को संपादित करने के लिये बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ। अश्विनी जी का कार्य के प्रति समर्पण अनुकरणीय है।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन

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