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Dr. Srimati Tara Singh
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शब्द

 

शब्द

शब्दों की आत्मा में उतर कर देखिए,
शब्दों के भाव क्या, समझ कर देखिए।
मौन होते मुख से, तब नैनों से बोलते,
शब्द के अर्थ में, जगत का सार देखिए।

शब्दों की आत्मा में उतर कर देखिये,
पाप पुण्य यश अपयश शब्दों में देखिये।
व्याकुल- व्यथित शब्द, आह भरते शब्द,
व्यथित हृदय पर मरहम, शब्दों में देखिये।

शब्द ही हैं रामायण, गीता पुराण हैं,
शब्दों में ही महावीर, बुद्ध का ज्ञान है।
पाप पुण्य की गाथा, शब्दों में कही है,
ऋषियों की वाणी, ज्ञान का बखान है।

धर्म- कर्म- संस्कृति, शब्दों में कही गयी,
पाप पूण्य की कथा, शब्दों में गढी गयी।
ब्रह्माण्ड के रहस्य, विज्ञान की अवधारणा,
अध्यात्म चिंतन बातें, शब्दों में मंढी गयी।

शब्द ही ज्ञान हैं, शब्द ही विज्ञान हैं,
शब्द की सामर्थ्य, शब्द में बयान है।
ॐ में ब्रह्मांड स्थित, ॐ गुंजायमान,
शब्द शक्ति का गुंजन, शब्द प्राण है।

राम में निहित अर्थ, बस राम में निहारिये,
पाताल आकाश मृत्युलोक, राम में पाइये।
तीन लोक के स्वामी, मेरे हृदय में रम रहे,
आनन्द का मूल स्रोत, राम को अपनाइये।

शब्दों में शक्ति का गुंजन, विनम्रता बोध भी,
मैं ब्रह्म सर्वशक्तिमान भाव, शब्दों में देखिये।
माँ की ममता शब्दों में, बहन का स्नेह दुलार,
पिता का साया “मैं हूँ ना”, शब्दों में देखिये।

कौन क्यों कितना जिया, कौन कब कैसे मरा,
अपने कर्मों का लेखा जोखा, शब्दों में देखिये।
राम कृष्ण शब्दों में वर्णित, महाबीर बुद्ध सार,
वेद पुराण उपनिषदों का ज्ञान, शब्दों में देखिये।

ॐ का गुंजायमान, ब्रह्माण्ड की आवाज बनते,
सप्त लोक में जो भी स्थित, शब्दों में देखिये।
हार का मौन- जीत का शंखनाद, शब्दों में छिपा,
मृत्यु के बाद- आत्मा का सार, शब्दों में देखिये।

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन

53 महालक्ष्मी एनक्लेव 
मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश 
8365821800

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