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Dr. Srimati Tara Singh
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सवर्ण होने की पीड़ा

 
सवर्ण होने की पीड़ा

किसको अपनी पीर कहें, हम सवर्ण हैं,
दया दान धर्म पालन रीति, हम सवर्ण हैं।
मेहनत कर आगे बढ़ते, नही ईर्ष्या भाव,
फिर भी दोषी कहलाते, कि हम सवर्ण हैं।

कोई बाह्मन पंडत ठाकुर, कोई बनिया कहता,
सारे धर्मों में ढोंग भरा, हमको पाखंडी कहता।
व्यापार में बनियों को, बेईमान बताते सारे लोग,
बिना लिखे उधार देता, व्यापार में धाक जमाता।

धन सम्पत्ति मान प्रतिष्ठा, दाँव पर लगते उसकी,
विपदाओं में राहत सामग्री, भंडारे दुकान पर उसकी।
पूजा पाठ धर्म कर्म, नेताओं की मीटिंग रैली भाषण,
सबको चन्दा सबको रिश्वत, निगाह आय पर उसकी।

धर्म ग्रंथों का ज्ञाता बनकर, दिशा समाज को देता,
निज मेहनत से आगे बढ़ता, धर्म ग्रंथों का अध्येता।
अध्यात्म के गूढ़ रहस्य, काल गणनायें करने वाला,
ब्रह्मांड की संरचनायें, जो ज्योतिष में बतला देता।

ठाकुर क्षत्रिय खेल जान पर, सीमा की रक्षा करते,
राष्ट्र हितों पर क़ुर्बानी, उनके कतरे कतरे में बसते।
महिलाएँ भी वीरांगना, सुरक्षा बलों में साथ निभाती,
लिये खड़े हैं जान हथेली, दुश्मन से कभी नहीं डरते।

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन



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