सर्दी का आनन्द, कुछ यूँ लिया जायेगा,
बिस्तर में बैठकर, चाय पिया जायेगा।
मूँगफली भी साथ होंगी, बैठ रज़ाई में,
परिवार संग सर्दी, मज़ा लिया जायेगा।
मक्का की रोटी, सरसों का साग बनेगा,
चुल्हे के पास बैठ, मट्ठे संग स्वाद बनेगा।
सर्दियों में गुड़ बिना बात अधूरी रहती है,
ममता का मक्खन, रोटी संग प्यार बनेगा।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY