Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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मेरे दिल में हरदम रहती

 
उसकी यादें उसकी बातें, मेरे दिल में हरदम रहती,
जुदा हुए बरसों बीतें हैं, वह कब मन से बिसराती।
नींद नहीं आती रातों में, उसके ख़्यालों में रहता हूँ,
नयन झुका बातें करना, मौन रह कुछ कह जाती।

कभी- कभी खिड़की से, मुझको देखा करती थी,
नज़र मिली नज़रों से, शरमा कर छिप जाती थी।
नित नये बना बहाने, वह मेरे घर पर समय बिताती,
बातें करती मेरी माँ से, नज़रें मुझको ही तकती थी।

मर्यादा में बँधी हुई वह, मन की बात कह न पाई,
विरहिणी सी भटक रही, मन की बात कह न पाई।
हम चातक सी आस लगा, स्वाति नक्षत्र खोज रहे,
विदा हुई बाबुल घर से, मन की बात कह न पाई।

प्यार पहला वह मेरा थी, कहाँ आज भी भूले हैं,
उसके ख़्यालों में जीवन, कहाँ आज भी भूले हैं?
हँसती थी तो ऐसा लगता, साज कहीं बज़ उठते,
खुले बाल चंदा सा चेहरा, कहाँ आज भी भूले हैं।

नहीं पता किस ठौर वह, किस हाल में रहती है,
मेरे ख्वाबों की महारानी, वो मेरे दिल में रहती है।
हर पल उसकी आहट आती, दर पर लगता आयी,
सुबह शाम चौबीस घंटे, वह मेरे संग संग रहती है।

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
उसकी यादें उसकी बातें, मेरे दिल में हरदम रहती,
जुदा हुए बरसों बीतें हैं, वह कब मन से बिसराती।
नींद नहीं आती रातों में, उसके ख़्यालों में रहता हूँ,
नयन झुका बातें करना, मौन रह कुछ कह जाती।

कभी- कभी खिड़की से, मुझको देखा करती थी,
नज़र मिली नज़रों से, शरमा कर छिप जाती थी।
नित नये बना बहाने, वह मेरे घर पर समय बिताती,
बातें करती मेरी माँ से, नज़रें मुझको ही तकती थी।

मर्यादा में बँधी हुई वह, मन की बात कह न पाई,
विरहिणी सी भटक रही, मन की बात कह न पाई।
हम चातक सी आस लगा, स्वाति नक्षत्र खोज रहे,
विदा हुई बाबुल घर से, मन की बात कह न पाई।

प्यार पहला वह मेरा थी, कहाँ आज भी भूले हैं,
उसके ख़्यालों में जीवन, कहाँ आज भी भूले हैं?
हँसती थी तो ऐसा लगता, साज कहीं बज़ उठते,
खुले बाल चंदा सा चेहरा, कहाँ आज भी भूले हैं।

नहीं पता किस ठौर वह, किस हाल में रहती है,
मेरे ख्वाबों की महारानी, वो मेरे दिल में रहती है।
हर पल उसकी आहट आती, दर पर लगता आयी,
सुबह शाम चौबीस घंटे, वह मेरे संग संग रहती है।

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन 








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