लौह पुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल के जन्मदिन पर सादर नमन
संकल्प आपका रजवाड़ों को, राष्ट्र हित में साधेंगे,
हम जाति-धर्म की तोड़ दीवारें, राष्ट्र प्रेम में बाँधेंगे।
तुष्टिकरण नहीं होगा, न हिन्दू- मुस्लिम की बातें,
राष्ट्र सनातन का अनुयाई, भगवा से पहचानेंगे।
पद चिन्ह बनाये जो तुमने, उन पर राष्ट्र अग्रसर है,
राष्ट्रवाद सिद्धांत हमारा, जाति धर्म से बढ़कर है।
तुष्टिकरण खेल किसी का, सब पर अब भारी है,
विकास की राह पर बढ़ना, राष्ट्र इसी पर तत्पर है।
भेड़ खाल में अनेक भेड़िये, घर के भीतर छिपे हुए,
भेड़ों के संरक्षण दायित्व, खुद भेड़ियों को दिये गये।
नहीं समर्थन में कोई था, किसने उनको बिठलाया?
वही भेड़िये खाल बेचते, दुश्मन के हाथों बिके दिखे।
बाग़ी बिखरे रजवाड़ों को, जोड़ लौह पुरुष कहलाये,
पर गाँधी नेहरू के सम्मुख, क्यों कमजोर नज़र आये?
एक ज़रा सी नादानी ने, भारत को भारत से तोड़ दिया,
आजाद हुए अंग्रेज़ी से पर, हालात बहुत बदतर पाये।
डॉ अ कीर्तिवर्धन

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