Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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काल

 
काल

काल के अधीन सब, कौन जिया या कौन मरा,
मौत कब कहाँ लिखी, बचपन जवानी या जरा?
कामना करते हैं सब, कुशल जीवन सबका रहे,
कर्म का फल भी यहीं, भाग्य में जो कुछ भरा।

कौन सा पल मौत होगा, किसको मिलेगी जिंदगी,
देख कर असामयिक घटना, बिलख रही जिंदगी।
जाना जगत से विधान उसका, जानते हैं सब यहाँ,
इस तरह जाना पड़ेगा, किसने सोचा बता जिंदगी?

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन



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