घनी धूप में तुम बादल का टुकड़ा हो,
जीवन की आस पानी का एक कतरा हो।
प्यार मोहब्बत लड़ना झगड़ना, सब तुमसे,
ज़िंदगी की ग़ज़ल का खुबसूरत मतला हो।
तुमसे ही अस्तित्व बना है, अपने घर का,
तुमसे ही निर्माण हुआ, मकान से घर का।
तोरे कारण घर बगिया में, प्यार पुष्प खिले,
तुमसे ही गृहस्थी,मन्दिर बना अपने घर का।
अ कीर्ति वर्द्धन
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