बाँटने वालों का बोलबाला
योग्यता अब ठोकरों पर, आरक्षण का बोलबाला,
पढ़ना लिखना व्यर्थ हुआ, जातियों का बोलबाला।
गिर रहे पुल इमारत, मर रह मरीज़ रोज़, क्या हुआ,
प्रतिभायें करती पलायन, भ्रष्टाचार का बोलबाला।
बाँटकर हिन्दुओं को, जाति धर्म और क्षेत्रवाद में,
अगडे पिछड़े सवर्ण दलित, सत्ता का बोलबाला।
अगडों में पिछड़े ढूँढें, पिछड़ों में भी पिछड़ा कौन,
बाँटने की होड़ मची, बाँटने वालों का बोलबाला।
कब तलक ख़ामोश रहकर, यूँ बँटते घरों को देखिएगा,
आवाज़ उठाओ निकलो सडक, जनता का हो बोलबाला।
बाँटने का खेल खेलें, वोट से वंचित करो- बाहर धकेलो,
बढ़ने का अवसर सभी को, बस मानवता का बोलबाला।
समान शिक्षा समान चिकित्सा, सबके लिए उपलब्ध हो,
हर हाथ को काम पेट को रोटी, स्वच्छता का बोलबाला।
सुदृढ़ सीमा के प्रहरी, देखकर रूह काँपे दुश्मनों की,
ज्ञान का परचम फहराये, सशक्त राष्ट्र का बोलबाला।
हैं बहुत राणा यहाँ पर, विक्रमादित्य से राष्ट्र नायक,
शल्य चिकित्सा के जनक, शुश्रुत चरक का बोलबाला।
सृष्टि के गूढ़ रहस्य, ज्ञान विज्ञान गणित की जटिलताएँ,
वेदों में वर्णित सभी कुछ, ऋषि मुनि गुरुओं का बोलबाला।
आरक्षण की बैशाखियों पर, कौन सशक्त कैसे बनेगा,
योग्यताएँ सिसकती रहेंगी, नाकाराओं का बोलबाला।
समृद्ध सशक्त राष्ट्र की कल्पना, फिर भला कैसे करोगे,
घोड़े उठायें बोझ जग का, सत्ता पर गधों का बोलबाला।
बन्दर बनेंगे जंगल के राजा, बस कूदते फाँदते रहेंगे,
बकरियों की फ़रियाद पर, दिखावे का बोलबाला।
कुछ को बाँटा जातियों में, पूजा उपासना में कुछ बँटे,
सारे सनातनियों को बाँटा, बाँटने वालों का बोलबाला।
डॉ. अ. कीर्ति वर्द्धन
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