Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

सेवानिवृत्ति के बाद

 
सेवानिवृत्ति के बाद ——-

शुरू हो गया आजकल, एक नया ही काम,
खाली बैठे थक गये, कितना करें आराम?

होती बातें प्यार की, जो हफ्ते मे एक बार,
अब बातें जो भी करें, करें जहर का काम।

पहले चाहत थी बहुत, हों फुरसत के पल,
निट्ठले का लेविल लगा, होने लगे बदनाम।

सेवानिवृत्ति क्या हुयी, लगने लगे बेकार,
व्यस्तता कुछ बनी रहे, हो अपना सम्मान।

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन



Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ