सेवानिवृत्ति के बाद ——-
शुरू हो गया आजकल, एक नया ही काम,
खाली बैठे थक गये, कितना करें आराम?
होती बातें प्यार की, जो हफ्ते मे एक बार,
अब बातें जो भी करें, करें जहर का काम।
पहले चाहत थी बहुत, हों फुरसत के पल,
निट्ठले का लेविल लगा, होने लगे बदनाम।
सेवानिवृत्ति क्या हुयी, लगने लगे बेकार,
व्यस्तता कुछ बनी रहे, हो अपना सम्मान।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
शुरू हो गया आजकल, एक नया ही काम,
खाली बैठे थक गये, कितना करें आराम?
होती बातें प्यार की, जो हफ्ते मे एक बार,
अब बातें जो भी करें, करें जहर का काम।
पहले चाहत थी बहुत, हों फुरसत के पल,
निट्ठले का लेविल लगा, होने लगे बदनाम।
सेवानिवृत्ति क्या हुयी, लगने लगे बेकार,
व्यस्तता कुछ बनी रहे, हो अपना सम्मान।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
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