खामोशियों के दरम्यान, मौन जब मुखर हुआ,
शब्द सारे खो गए, बस नयन संवाद करने लगे।
खो गये प्रश्न सारे, अब कौन किससे क्या कहे,
पिघल गयी वेदनाएँ, शुष्क नयन सजल होने लगे।
अ कीर्ति वर्द्धन
Powered by Froala Editor
Powered by Froala Editor
LEAVE A REPLY