वतन के गुमनाम शहीदों को समर्पित
जयहिंद ऐसे वीरों को, वतन पर सिर कुर्बान किया,
कांग्रेस ने सत्ता खातिर, उन सबको कुर्बान किया।
शहीदों को बिसराकर, चरखे से आजादी बतलाई,
फूल गुलाब याद रहे, भगत को भी कुर्बान किया।
भूल गये उन शहीदों को, जिन्होंने लाठी गोली खाई थी,
फांसी के बन्दे को चूमा था, अंग्रेजों को धूल चटाई थी।
मां बाप परिवार छोडकर, ललनाओं का हाथ छोडकर,
संघर्षों से हाथ मिला सुभाष ने, अंग्रेजों को धता बताई थी।
अ कीर्ति वर्द्धन
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