
Kirtivardhan Agarwal
निर्माण के लिये अवसान का होना जरूरी है,
सुबह के लिये शाम का होना जरूरी है।
वृक्ष काटने जरूरी हों, तो जरूर काटिये,
उससे भी ज्यादा पौधों का रोपना जरूरी है।
जीवन अगर मिला है, मरना भी पडेगा ही,
जो आया इस धरा पर, जाना भी जरूरी है।
बढ रहा प्रदूषण धरा पर, सूर्य भी तो तप रहा,
गर्मी से राहत मिले, वृक्षारोपण भी जरूरी है।
करते नही विरोध हम, विकास के मार्ग का,
बढती जरूरतें हों, विकास भी जरूरी है।
अनियंत्रित हो विकास तो विनाश लाता है,
प्रकृति का सन्देश भी, समझना जरूरी है।
अ कीर्ति वर्धन
Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY