एक दीप प्यार का, दिल मे जला लो,नफरतों का अन्धेरा, कुछ तो मिटा लो।एक दीप ज्ञान का, जग मे जला लो,
अज्ञान का तम बहुत, कुछ तो मिटा लो।
एक दीप स्नेह का, घर में जला लो,
टूटते रिश्तों की दुनिया, कुछ तो बचा लो।
एक दीप संस्कार का, बच्चो मे जला लो,
संस्कार,संस्कृति, सभ्यता, कुछ तो बचा लो।
एक दीप एहसास का, खुद के लिये जला लो,
राष्ट्र हित कर्तव्य अपना, कुछ तो संभालो।
अ कीर्ति वर्धन
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