आत्म चिंतन जब किया, हम समझ गए,
प्यार के दो बोल को क्यों, लोग तरस गये?
होते नही खड़े हम कहीं, दूसरों के कष्ट में,
दूसरे भी यही सोच कर , हमसे दूर हट गये।
डॉ अ कीर्तिवर्धन
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