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*रावण दहन*

 

*रावण दहन*

दिलीप कुमार अग्रवाल



*दहन मात्र पुतलो का ही नहीं,*

*बुरे विचारो का भी करना होगा,*

*श्री राम का करके स्मरण,*

*हर रावण से लड़ना होगा।*


एक रावण अंदर भी, बाहर हर मोड़ पर घूम रहा है स्वतंत्र।

हर जीव पर दया हो, करूणा भी हो, यही तो है धर्म का मंत्र।


जब तक नीयत ठीक नहीं होगा, शांति नहीं आनेवाला। 

तिल तिल कर मरता रहेगा तिल मिला कर जीनेवाला ।


भले जग न सुधरे पर हमें सत्य पर सदा चलना चाहिए। 

भले लुट जांए हम पर किसी को लुटना तो नहीं चाहिए।


त्रेता का रावण तो जल गया, कलि का काल कब तलक जलेगा। 

देखना है कि पाखंड का पाप इस धरती पर कब तलक रहेगा।

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