Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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“रूमी के शब्द रूह से बात करते हैं”

 

“रूमी के शब्द रूह से बात करते हैं”जैसे ही मैंने इस किताब खोला और पन्ने पलटने शुरू किए, मुझे लगा
“रूमी के शब्द रूह से बात करते हैं”
जिस तरह से किताब का इंग्लिश से हिंदी और सिंधी में ट्रांसलेशन किया गया है,
वह न सिर्फ़ कमाल का है, बल्कि अपनी भाषा को बचाए रखने का एक अनोखा
प्रयास है जो तारीफ़ के काबिल है।
सिंधी भाषा में दिलचस्पी रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस किताब को पढ़ सकता
है और इसे अच्छी तरह समझ सकता है। किताब के हर शब्द में बहुत गहराई है,
जिसे पढ़ने पर सोच, समझ, होश और अकीदत बढ़ती है।
जब मैंने पहली बार रूमी की किताब उठाई, तो मुझे ऐसा लगा जैसे इसमें लिखा
हर शब्द मेरे लिए लिखा गया हो, मुझे एड्रेस करके लिखा गया हो। जलालुद्दीन
रूमी एक क्रिएटिव कवि हैं जिनका हर शब्द आज की सदी के लोगों को इंस्पायर
करता है। रूमी की किताब पढ़ने से इंसान को खुद को खोजने और सच्चे भगवान
से मिलने की हिम्मत मिलती है।

यह किताब सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि ज्ञान का खज़ाना है। जैसे-जैसे मैं इसे
पढ़ती हूँ, ज्ञान का खज़ाना बढ़ता जाता है। जब मैं किताब का डेडिकेशन पढ़ता हूँ,
तो मैं उस अंधेरे में खो जाता हूँ जिसमें मैं सोचता हूँ और रोशनी की तलाश में
अपने मन को टटोलता हूँ। यह किताब हर उस पल को समर्पित है जो मेरे दिल
की गहराइयों में शांति और संगीत के एहसास को ज़िंदा रखता है।

रूमी की किताब पढ़ते समय मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया के सफ़र
पर हूँ, जहाँ कोई नहीं है, जहाँ सिर्फ़ मैं हूँ, मेरी आत्मा मुझसे कितनी मीठी बातें कर
रही है।
मैंने इस दुनिया की भागदौड़ से आज़ादी महसूस की और शांति के दायरे में
शामिल हो गयी, जिसकी शायद मुझे ज़रूरत थी। जब मैंने रूमी को पढ़ा, तो मैंने
उनके ज्ञान से सीखा:
प्यार क्या है?
प्यार का नतीजा क्या होना चाहिए?
प्यार की फ़िलॉसफ़ी क्या होनी चाहिए?

यहाँ रूमी की कुछ लाइनें हैं:
अंदर झाँकना शर्मनाक है,
लेकिन इससे राज़ खुल जाएगा।
जब तक माँ को बच्चे के जन्म का दर्द नहीं होता,
बच्चा पैदा नहीं हो सकता।
रूमी की सिर्फ़ ये कुछ लाइनें ही नहीं, बल्कि उनका हर शब्द समंदर जितना गहरा
है। यहाँ कोई भी खुद को देखने को तैयार नहीं है क्योंकि जब वह खुद को देखेगा
तो उसका हर काम उसके सामने आ जाएगा (कोई भी अपनी बुराई सुनने को
तैयार नहीं है)

तो रूमी कहते हैं कि जब कोई इस दर्द, तकलीफ और यातना से नहीं गुजरता, जैसे
एक माँ बच्चे को जन्म देने के दर्द से गुजरती है, तो उसे अपने बारे में जानकारी
नहीं मिल सकती, वह एक अच्छा इंसान नहीं बन सकता। अगर उसे एक अच्छा
इंसान बनना है, तो उसे अपने अंदर झाँकना होगा और अपनी भीतर की गाठें
खोलकर भीतर के राज़ जानने होंगे।
मुर्क हिसबानी
अनुवाद-इंग्लिश से हिंदी में:देवी नागरानी
सिंधी में: शब्बीर कुंभार
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