पर्दा गिरा तो आँख में मंज़र ठहर गया
एक फ़नकार आज हमसे बिछड़ गया।
जिसकी आवाज़ में ज़माने का दर्द बोलता था
वो आज ख़ुद ख़ामोशी की तरफ़ निकल गया।
किरदार आते-जाते रहे इस फ़िल्मी शहर में
मगर वो हर किरदार में अपना असर भर गया।
हमने जिसे पर्दे पे कई बार टूटते देखा,
वो जाते-जाते भी हमें जीना सिखा गया।
लफ़्ज़ कम थे, मगर असर उम्र भर का था
वो बोलता रहा और दिलों में उतर गया।
आज उसकी कमी को कोई संवाद भर नहीं सकता,
एक आवाज़ गई तो जैसे एक दौर गुज़र गया।
नाना आपका जाना सिर्फ़ एक कलाकार का जाना नहीं
हिंदी सिनेमा का एक ज़िंदा अध्याय बिछड़ गया।
पर्दा आज भी वही है, रोशनी भी वही है,
बस एक चेहरा गया हैऔर सिनेमा थोड़ा ख़ामोश हो गया।
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