Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

अभी जो अजनबी हैं कल कहानी बन जाएँगे

 

अभी जो अजनबी हैं कल कहानी बन जाएँगे


Devansh saxena

अभी जो अजनबी हैं कल कहानी बन जाएँगे, ये चेहरे वक़्त के साथ अपनी निशानी बन जाएँगे।


जो आँखों में लिए आए हैं दुनिया जीतने के सपने, यक़ीं रखिए, यही सपने कभी ज़िंदगानी बन जाएँगे।


नए क़दमों की आहट से महक उठेगा ये आँगन, ये ख़ामोश से रास्ते भी एक दिन ज़ुबानी बन जाएँगे।


यहाँ किताबों से आगे भी बहुत कुछ सीखना है, कभी रिश्ते, कभी अनुभव, कभी क़ुर्बानी बन जाएँगे।


ज़रा-सी देर में देखो, ये कैसा रंग छाएगा, जो कल तक नाम पूछेंगे, वो अपनी ज़ुबानी बन जाएँगे।


किसी की हँसी क्लासों में अचानक गूँज जाएगी, किसी के नोट्स माँगने के भी अफ़साने बन जाएँगे।


कभी लेक्चर से पहले चाय पर महफ़िल सजेगी, कभी कैंटीन के क़िस्से भी बड़ी कहानी बन जाएँगे।


कभी असाइनमेंट की रातें सताएँगी बहुत तुमको, मगर दोस्तों के साथ वही रातें सुहानी बन जाएँगी।


यहाँ सीनियर कोई दीवार बनकर बीच में क्यों आए, हमारी दोस्तियाँ तो दो दिलों की रवानी बन जाएँगी।


न उम्रों का कोई फ़ासला, न रुतबे की कहानी हो, जहाँ इज़्ज़त हो दोनों ओर, वहीं यारी पुरानी हो।


कभी कुछ पूछने आना, कभी बेझिझक बताना, तुम्हारी जीत की ख़ुशियाँ हमारी भी कहानी हों।


यहाँ हर शख़्स के भीतर कोई हुनर सोया बैठा है, ज़रा मौक़ा मिले तो ख़ूब चमकता आसमाँ होगा।


किसी की आवाज़ कल मंचों की पहचान बन जाएगी, किसी की सोच से बदलेगा ज़माना, ये जवानी होगी।


मगर इतना याद रखना, सिर्फ़ मंज़िल ही नहीं सब कुछ, सफ़र में कौन अपना था, यही असली कमाई होगी।


कभी जब वक़्त तुमको इस इमारत से विदा देगा, तुम्हारी आँख में यादों की इक दुनिया रवानी होगी।


तब शायद इन दरख़्तों की तरफ़ मुड़कर कहोगे तुम, यहीं हँसना सिखा था, यहीं पहली कहानी थी।


वो बेंचें, वो गलियारे, वो दोस्तों की बेफ़िक्री, तुम्हारे दिल के क़िस्सों की हमेशा मेज़बानी होगी।


तो आओ, आज से इस कारवाँ में साथ चलते हैं, तुम्हारे ख़्वाब अपने हैं, तुम्हारे साथ पलते हैं।


न तुम मेहमान हो कोई, न हम कोई अलग दुनिया, चलो, मिलकर नए लम्हों के कुछ इतिहास लिखते हैं।


तुम्हारी मुस्कुराहट से ये महफ़िल और रोशन हो, तुम्हारे नाम से अब इस कॉलेज की पहचान हो।

और आख़िर में बस इतनी-सी गुज़ारिश है तुम सबसे, यहाँ आकर न केवल कामयाबी, इंसानियत भी साथ हो।


जो आए हो तो कुछ यादें यहाँ से लेकर जाना, किसी के दर्द में शामिल होना, किसी को हँसाना।

मैं बस यही कहता हु ये रिश्ता ख़ास रहने दो, आज अजनबी सही, कल एक-दूजे की आस रहने दो।


ये महफ़िल आज की है, पर ये यादें उम्र भर की हैं, नए चेहरों, नए ख़्वाबो

तुम्हारा ये घर अपना है, तुम्हारा आज अपना है तुम्हारा कल भी अपना है



Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ