हे देव वृक्ष हे अक्षयवट
अक्षयवट के मूल में
ब्रह्मदेव का होता निवास
मध्य भाग में नारायण
अग्र में करते शंकर वास.
वटवृक्ष के नीचे ही
यमपूजा का है विधान
मांगी थी सावित्री ने
यम से अपने पति का प्राण.
पाकर जीवन सत्यवान का
सौभाग्यवती कहलाई थी
सावित्री जैसी नारी की
ईश भी महिमा गाई थी.
अखंड सौभाग्य को देनेवाले
हे देव वृक्ष हे अक्षयवट
सुहाग अटल हो सुहागन की
नमन करते हैं श्रद्धा वत.
भारती दास ✍️
वट-सावित्री पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं
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