Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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नारी हर तरफ नज़र आती है

 

नारी हर तरफ नज़र आती है जहाँ तक नज़र जाती है



नारी हर तरफ नज़र आती है, जहाँ तक नज़र जाती है,

मकान को घर बनाती है,  

बाज़ार में चाहे लाखों वार करें लोग घर आकर हर रोज़ की तरह मुस्कुराती है,  

कभी चरित्र पे दाग सहे उसने, कभी नारी होने पे ख़ामियाज़ा भरा पर किसको वो सताती है,  

नारी हर तरफ नज़र आती है जहाँ तक नज़र जाती है।


कर के खुद को तैयार जब वो घर से निकलती है उसके साथ पूरे खानदान की आस जाती है, 

ज़रा सा कुछ होने से पहले ही वो डर जाती है कहते हैं लड़की के साथ पूरे खानदान की भी इज़्ज़त जाती है,  

जहाँ देखो वहाँ वो नज़र आती है कभी सीता सी वनों में मुस्कुराती है,  

तो कभी बन के पांचाली खुद ही के महलों में लड़खड़ाती है,  

इतने पुरुषों की सभा में भी लाज बचाने भगवान को बुलाती है,  

नारी हर तरफ नज़र आती है जहाँ तक नज़र जाती है,


दो ही हाथ हैं मगर सब कर जाती है,  

सुबह, दोपहर, शाम, हर घड़ी उसके लिए तो काम में ही गुज़र जाती है,  

फिल्मों में नायक जरूरी है, हकीकत में महिलाएँ नायक बनाती हैं,  

खुशियाँ उसकी अपनों में हैं, और अपने सब अपने में हैं,  

रास्तों को वो महका रही है, अब तो ज़मीन ही नहीं बल्कि आसमान में भी नज़र आती है जहाँ तक नज़र जाती है,


पुरानी कुरीतियों के बंधन तोड़ कर नए कायदे बना रही है,  

लोग तर्क कर रहे हैं वो छू कर आसमान आ रही है,  

सिर्फ घर में ही नहीं बल्कि वो परीक्षाओं में भी अव्वल आ रही है  

एक नारी पूरा प्रशासन हिला रही है,  

ये सब छोटा लगता है, हकीकत में यही नींव है जो पूरा मकान बना रही है,  

ज़रा नज़र घुमा कर देखो..  

नारी हर तरफ नज़र आती है जहाँ तक नज़र जाती है,,


अब आधुनिक भारत में बदलाव कुछ इस तरह आ रहे हैं, वो रोटी बनाने वाले हाथ अब देश का भविष्य बना रहे हैं,  

जिन्होंने पर्दे में काट दी ज़िंदगी वो अब दुनिया को रास्ता दिखा रहे हैं,  

अब ज़रा गौर फरमाइए अपनी नज़रों को घुमाइए जहाँ तक नज़रें जाती हैं वहाँ तक नारी ही नज़र आती है, हर दिन रोज़ नया काम कर जाती है रोज़ नया परचम लहराती है,  

नारी हर तरफ नज़र आती है जहाँ तक नज़र जाती है

                                     अनुष्का शर्मा

 


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