*खुद की तलाश*
अनुष्का शर्मा
देख आया मैं ज़माना,
अब खुद की तलाश में हूँ,
सही ग़लत के आगे एक अलग जहान में हूँ,
मैं खुद की तलाश में हूँ,
देख आया मैं नदियाँ और पहाड़ भी
अब खुद ही खुद के बहाव में हूँ,
छोड़ कर दुनिया को,
मैं खुद की तलाश में हूँ,
देख आया रिश्ते और अपने भी,
कुछ ख़्वाब और कुछ सपने भी,
अब एक अलग इम्तेहान में हूँ,
मैं खुद की तलाश में हूँ,
देख आया मैंने खुशी, सच्चाई,
अपनापन और अच्छाई भी,
अब हकीकत की राह में हूँ,
मैं खुद की तलाश में हूँ,
अनुष्का शर्मा
. ख़फ़ा मुझसे सब है मैं भी खुद से होने लगा हूँ।
फिर सोचता हूँ सब में क्या मैं अपने आप को खोने लगा हूँ?
ये तो उसूल है ना दुनिया का कि कोई अपना नहीं होता,
मैं ही पागल हूँ जो सबका होने में लगा हूँ,
कितने अरसे बीते रातें गुज़री सोचने में उसको इसको,
खुद में कहाँ हूँ मैं?
सब का पता पूछते पूछते क्या मैं भी खोने लगा हूँ?
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