अंजनी कुमार पाठक
सही दोस्त !
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भाई कुछ मदद करो,मेरा बच्चा काफी दिनों से बीमार है,स्थिति काफी गंभीर है।सही दोस्त की पहचान बुरे वक्त पर होती है।यह सोचकर तथा एक सही दोस्त का फर्ज निभाते हुए अपने दोस्त गिरधारी को एक हजार रुपये कर्ज स्वरूप दिये।
अब गिरधारी का बच्चा भी स्वस्थ है तथा सपरिवार सुख-चैन से रह रहा है।
एक अरसे के बाद गिरधारी से मैंने कहा-अरे यार ,मेरे एक हजार रुपये कब लौटा रहे हो?
तपाक से गिरधारी ने कहा-तुमने मुझे बुरे वक्त पर मदद की थी ।मैं भी तुम्हारे बुरे वक्त का इन्तजार कर रहा हूं ताकि मैं भी एक सही दोस्त की भांति तुम्हारे बुरे वक्त पर काम आ सकूं।
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