राम सुमिर ले प्राणी रे
राम सुमिर ले प्राणी रे
तेरी तर जायेगी जिन्दगानी रे
जीवन का हर रुप अलबेला
काम क्रोध मद लोभ ने घेरा
चार दिनों की दाना -पानी
फिर हो जाये खतम कहानी रे
तेरी तर जायेगी जिन्दगानी रे
संघर्ष ही जीवन सुख-दुख है रहता
आज तेरा कल किसी का है होता
रहा ना कोई इससे वंचित
जीव जगत के प्राणी रे
तेरी तर जायेगी जिन्दगानी रे
राम जी की कृपा हर जीव पर रहती
हर सांसों में प्राण में है रहती
श्रीराम भजन जहां भी है होता
संकटमोचक हनुमान वहां रे
तेरी तर जायेगी जिन्दगानी रे।
-अंजनी कुमार पाठक, ब्राह्मण टोली,मुज़फ्फरपुर, बिहार
Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY