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पहले जैसा गांव नहीं

 

पहले जैसा गांव नहीं

    -अंजनी कुमार पाठक


पहले जैसा गांव नहीं

खेत खलिहान  वीराने लगते

पीपल की छांव अन्जाने लगते

अब होता चौपाल नहीं

पहले जैसा गांव  नहीं

शहर कमाने मजदूर  निकलते

इससे इनके परिवार  है पलते

हाट में अब भीड़भाड  नहीं

पहले जैसा गांव  नहीं

जो भी योजना गांव की बनती

लाभ मुट्ठीभर  को ही मिलती

सभी यहां ईमानदार  नहीं

पहले जैसा गांव नहीं

शहर प्रदूषित गांव सुरक्षित 

हरियाली से तन मन हर्षित 

पर,अपनापन का भाव नहीं

पहले जैसा गांव  नहीं

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