मनुज यह भूल रहे !
---अँजनी कुमार पाठक
धैर्य संयम त्याग मनुज भूल रहे
किसने है देखा कल मनुज यह भूल रहे?
हर समस्या का समाधान होता रहा अक्सर
तनाव से मुक्ति योग है मनुज यह भूल रहे
काम ऐसा ना करो मनुज तुम स्वार्थ में
संतोष ही परम सुख है मनुज यह भूल रहे
प्यार में धोखा होता रहा है अक्सर
अंधा होता प्यार है मनुज यह भूल गये
जो भी मिली है जिन्दगी प्रेम से जीयो
शान्ति और प्रेम की भाषा मनुज यह भूल गये
कोई भूखा ना रहे कभी इस संसार में
दरिद्र में ही नारायण हैं मनुज यह भूल रहे।
---अँजनी कुमार पाठक
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